इटारसी। जीवन में कुछ रिश्ते खून के नहीं, बल्कि सेवा और स्नेह के होते हैं। आज हम आपको एक ऐसी पिता और बेटी के रिश्ते की कहानी बता रहे हैं, जिसने पूरे समाज को भावुक कर दिया है। यह कहानी है मुस्कान बालिका गृह की बेटी शिवानी की, जिनका विवाह संस्था के संचालक मनीष सिंह ठाकुर और उनका परिवार स्वयं अभिभावक बनकर कर रहे हैं।
इटारसी के वृंदावन गार्डन में 26 नवंबर को दोपहर 12 बजे से होने जा रही यह शादी एक साधारण विवाह नहीं है, बल्कि निस्वार्थ प्रेम और समर्पण का महापर्व है। आज शिवानी, जिसकी परवरिश मुस्कान बालिका गृह में हुई है, दुल्हन बनने को तैयार है। एक समय था जब शिवानी अनाथ थीं, लेकिन संस्था के संचालक, मनीष सिंह ठाकुर और उनका परिवार सिर्फ संस्था संचालक नहीं बने, बल्कि उन्होंने शिवानी को दिल से अपनी बेटी का दर्जा दिया।
यह पहला मौका नहीं है। मुस्कान संस्था के संचालक मनीष ठाकुर अब तक एक दर्जन से अधिक ऐसी बेटियों का विवाह स्वयं अभिभावक बनकर, पिता की भूमिका निभाते हुए, उनका कन्यादान कर चुके हैं। शिवानी इस कड़ी में उनकी अगली बेटी हैं।
इस विवाह में कहीं भी दिखावा नहीं है। शिवानी और सत्यम चौरे का यह शुभ विवाह गायत्री पद्धति से, अत्यंत सादगीपूर्ण तरीके से संपन्न हो रहा है। यह सादगी ही समाज को संदेश देती है कि रिश्तों का महत्व धन-दौलत से नहीं, बल्कि संस्कारों से होता है। वर पक्ष का यह निर्णय भी सराहनीय है, जिन्होंने शिवानी के अतीत को नहीं, बल्कि उसके उज्जवल भविष्य और संस्कारों को अपनाया है।
मनीष ठाकुर कहते हैं कि हर बेटी के लिए पिता का फर्ज निभाना मेरा सौभाग्य है। शिवानी सिर्फ संस्था की नहीं, वह हमारी बेटी है। उसे विदा करते हुए आंखें नम हैं, लेकिन खुुशी है कि उसे सत्यम और एक अच्छा परिवार मिला है। हम समाज को बस इतना ही बताना चाहते हैं कि संस्था के बच्चे, आपके भी बच्चे हैं।
मुस्कान संस्था ने साबित कर दिया है कि अनाथालय सिर्फ चार दीवारी नहीं होते, बल्कि प्रेम और नए जीवन का आधार होते हैं। यह विवाह सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि मानवता और ममत्व की जीत है। वास्तव में यह कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो समाज सेवा को सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि जीवन का धर्म मानता है।









