इटारसी। शासकीय महात्मा गांधी स्मृति स्नातकोत्तर महाविद्यालय में चल रहे हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत, शुक्रवार को एक विशेष व्याख्यान, कविता पाठ और कथा गोष्ठी का आयोजन हुआ। यह कार्यक्रम भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ और हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य हिंदी के अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य और राजभाषा के रूप में उसकी दिशा पर चर्चा करना था।
हिंदी की वैश्विक स्थिति पर चर्चा
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राकेश मेहता ने अपने स्वागत उद्बोधन में बताया कि हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी भाषा और भारत में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय एकता का आधार है, लेकिन प्रशासन और अनुसंधान के क्षेत्र में इसे स्थापित करने के लिए और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है।
व्याख्यान और कविता पाठ
प्रसिद्ध साहित्यकार अशोक जमनानी ने अपने व्याख्यान में हिंदी के चार रूपों – तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशी का उल्लेख किया। उन्होंने आदिकाल से लेकर आधुनिक काल तक हिंदी साहित्य की यात्रा को उदाहरणों के साथ प्रस्तुत किया, जिसमें चंद्रबरदाई की ‘पृथ्वीराज रासो’, गोस्वामी तुलसीदास की चौपाइयां, केशवदास की ‘रामचंद्रिका’ और मैथिलीशरण गुप्त की ‘भारत भारती’ शामिल रहीं। इसके अलावा, उन्होंने अपनी कविता ‘बहों निरंतर, वहीं नर्मदा’ का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिसमें नर्मदा नदी की पवित्रता और लोक जीवन से जुड़ाव का सजीव वर्णन था।
आध्यात्मिक चेतना का संचार
राष्ट्रीय कथावाचक आचार्य पं. नरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने रामचरितमानस की चौपाइयों का रसपान कराया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। उन्होंने सरल भाषा में भक्ति, धर्म और जीवन मूल्यों का संदेश दिया। इस अवसर पर, तुलसी अकादमी के जिला अध्यक्ष और स्पिक मैके के संचालक सुनील वाजपेयी ने युवाओं को भारतीय शास्त्रीय कलाओं, योग और ध्यान के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था देशभर के स्कूलों और कॉलेजों में कार्यक्रम आयोजित करती है ताकि युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सके। संचालन हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. मनीष चौरे ने और आभार प्रदर्शन सुनील वाजपेयी ने किया।









