– ग्रामीणों ने प्रशासन से की त्वरित समाधान की मांग
रितेश राठौर केसला। आदिवासी विकासखंड केसला के ग्राम केसला के पलकों एवं ग्रामीणों ने ब्लॉक ऑफिस में आवेदन देकर अधिकारियों को अवगत कराया कि आदिवासी बहुल गांव केसला में आरटीई (नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम) के अंतर्गत बच्चों के भविष्य को लेकर एक गंभीर समस्या सामने आई है। गांव के स्कूलों का नाम आरटीई पोर्टल पर दर्ज नहीं होने के कारण बच्चों का दाखिला अटक गया है।
इस तकनीकी त्रुटि के कारण पात्र बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती आशा मौर्य को आवेदन सौंपा। उन्होंने ग्रामीणों का आवेदन पढ़कर बातचीत कर उच्च अधिकारी को अवगत कराया। ग्रामीणों ने विकासखंड स्रोत समन्वयक, जनपद शिक्षा केंद्र केसला को भी आवेदन देकर इस और ध्यान आकर्षित किया मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्कूल है लेकिन अधिकारियों को संभवत: इसकी जानकारी नहीं है। जनपद सदस्य विजय कावरे ने पालकों को हो रही बच्चों को भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की। इस अवसर पर जनपद सदस्य विजय कावरे, चंचल जायसवाल, राजा श्रीवास, मनीष सोनी, विनोद अग्रवाल, टेकचंद राठौर आदि उपस्थित रहे।
स्कूल की सीट की संख्या बढ़ाने आवेदन
केसला के निवासियों ने कहा कि यह आदिवासी क्षेत्र है और गांव की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पहले से ही अत्यंत पिछड़ी है शिक्षा ही हमारे बच्चों का भविष्य सुधारने का एकमात्र साधन है। वर्तमान में अभिभावक आरटीई अधिनियम के तहत अपने बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिलाना चाहते हैं, लेकिन आरटीई पोर्टल पर गांव के स्कूलों नाम ही प्रदर्शित नहीं हो रहा है, इस कारण हम ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पा रहे हैं, और अब आरटीई आवेदन की अंतिम तिथि 21 मई है। यानी केवल कुछ ही दिन शेष हैं। यदि यह तकनीकी समस्या शीघ्र हल नहीं हुई, तो हमारे बच्चों को उनके शिक्षा के संवैधानिक अधिकार से वंचित होना पड़ेगा।
यदि ऐसी तकनीकी त्रुटियाँ बनी रहीं, तो यह सिर्फ एक भूल नहीं बल्कि हमारे बच्चों के पूरे भविष्य के साथ अन्याय होगा। ग्रामीणों ने निवेदन किया है कि इस विषय को तत्काल प्रभाव से संज्ञान में लें, और ग्राम केसला के स्कूलों का नाम पोर्टल पर अपडेट कराने एवं स्कूलों में प्रवेश की संख्या बढ़वाने हेतु उच्च अधिकारियों तक शीघ्र लिखित सूचना भेजें ताकि बच्चों को समय रहते प्रवेश मिल सके।









