इटारसी। पूज्य पंचायत सिंधी समाज द्वारा हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी भगवान झूलेलाल चालीहा व्रत महोत्सव बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। चालीस दिनों तक चलने वाला यह पवित्र व्रत महोत्सव इस वर्ष इटारसी में अपनी 27 वीं वर्षगांठ मना रहा है, जिसमें न सिर्फ सिंधी समाज बल्कि अन्य समुदायों के लोग भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
पूज्य पंचायत सिंधी समाज के अध्यक्ष धर्मदास मिहानी ने बताया कि यह महोत्सव 22 जुलाई को प्रारंभ हुआ था और 31 अगस्त को इसका समापन होगा। समापन के दिन, नगर के हजारों श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जहां वे भोजन प्रसादी ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे।
व्रत का महत्व और विधि
श्री मिहानी ने बताया कि भगवान झूलेलाल चालीहा व्रत सिंधी समुदाय का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहार है। चालीहा का अर्थ है ‘चालीस’ और यह 40 दिनों का उपवास होता है जो भगवान झूलेलाल को समर्पित है। इस दौरान भक्तजन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और सुख-समृद्धि के लिए कठोर व्रत रखते हैं।
व्रत की मुख्य बातें
- अखंड ज्योति : व्रत के दौरान घरों और मंदिरों में भगवान झूलेलाल के समक्ष अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है।
- नियमित पूजा-अर्चना : प्रतिदिन सुबह-शाम भगवान झूलेलाल की पूजा-अर्चना की जाती है, जिसमें चालीहा पाठ, भजन-कीर्तन और आरती शामिल होती है।
- सात्विक आहार : व्रतधारी इन चालीस दिनों में सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं और कई लोग अन्न का त्याग कर केवल फल, दूध या जल पर निर्भर रहते हैं।
- ब्रह्मचर्य का पालन : व्रत के दौरान शारीरिक और मानसिक शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
- सेवा और दान : भक्तजन इस अवधि में दान-पुण्य और समाज सेवा के कार्यों में भी सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
इटारसी में आस्था का केंद्र
इटारसी स्थित श्री झूलेलाल मंदिर में हर रोज सिंधी समाज के अलावा भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसाद लेकर आरती-दर्शन करने पहुंचते हैं। इस व्रत की एक और खास बात यह है कि देश के अनेक शहरों से लोग इटारसी आकर अपने चालीस दिवसीय व्रत का समापन करते हैं, जिससे यहाँ का धार्मिक माहौल और भी अधिक भक्तिमय हो जाता है।
भव्य शोभायात्रा और विसर्जन
सिंधी पंचायत के अध्यक्ष धर्मदास मिहानी ने बताया कि महोत्सव के समापन वाले दिन, यानी 31 अगस्त को, सिंधी कॉलोनी में ‘बहराणा साहब’ की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। यह शोभायात्रा बैंड-बाजों, भजनों और नृत्य के साथ धूमधाम से निकाली जाती है, जिसमें भगवान झूलेलाल की प्रतिमा को एक सुंदर पालकी में सजाकर ले जाया जाता है। शाम को, समाज के सदस्य नर्मदापुरम (होशंगाबाद) जाकर नर्मदा नदी में बहराणा पूजन सामग्री का श्रद्धापूर्वक विसर्जन करेंगे। यह विसर्जन चालीहा व्रत के सफल समापन और भगवान झूलेलाल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक है। यह महोत्सव सिंधी समुदाय की अटूट आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकता का प्रतीक है, जो हर वर्ष इटारसी में एक नया उत्साह और भक्ति का संचार करता है।








