इटारसी। स्थानीय न्यायालय ने पुलिस उपनिरीक्षक के साथ मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा डालने के बहुचर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाया है।
प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्रीमती अनिता खजूरिया की अदालत ने शासन द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए सभी पांच आरोपियों को दोषमुक्त करने के आदेश जारी किए हैं।
क्या था मामला?
पुलिस द्वारा प्रस्तुत अभियोग पत्र के अनुसार, घटना 13 मार्च 2017 की है। इटारसी थाने में पदस्थ तत्कालीन उपनिरीक्षक उमाशंकर यादव ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि होलिका दहन की ड्यूटी के दौरान उन्हें राजस्थान मिष्ठान भंडार के पास कुछ युवकों द्वारा हुड़दंग करने की सूचना मिली थी। आरोप था कि जब पुलिस टीम मौके पर पहुँची, तो उत्सव दुबे, नीरज चौधरी, सचिन जैन, श्रीकांत जैन और पुनीत सोनी ने पुलिस बल के साथ गाली-गलौज की। इस दौरान उत्सव दुबे पर लाठी से हमला करने का आरोप था, जिससे एसआई की नाक पर चोट आई थी।
न्यायालय की कार्यवाही और फैसला
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 332 और 353 (लोकसेवक पर हमला) के तहत मामला दर्ज कर कोर्ट में चालान पेश किया था।
निचली अदालत का फैसला: न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सूर्यपालसिंह राठौर ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया था।
शासन की अपील: इस फैसले के खिलाफ राज्य शासन ने अपर सत्र न्यायालय में अपील दायर कर आरोपियों को सजा देने की मांग की थी।
अंतिम निर्णय: अपीलीय न्यायालय में बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं अशोक शर्मा, आरबी पांडे, संजय शर्मा, राजकुमार पांडे और सर्वेश शर्मा ने दलीलें पेश कीं। न्यायालय ने बचाव पक्ष के तर्कों को स्वीकार करते हुए माना कि आरोपियों के विरुद्ध दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं।
परिणामस्वरूप, श्रीमती अनिता खजूरिया, प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने शासन की अपील को निरस्त करते हुए निचली अदालत के दोषमुक्ति के फैसले को बरकरार रखा।









