इटारसी। ग्राम तारारोड़ा में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन कथावाचिका देवी रत्नमणि द्विवेदी ने बड़े ही मार्मिक ढंग से सृष्टि क्रम और भगवान वराह के अवतार का वर्णन किया। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर नजर आए।
सुख और दुख का रहस्य
कथा में विदुर-मैत्रेय संवाद का उल्लेख करते हुए देवीजी ने बताया कि संसार में हर मनुष्य सुख की खोज में कर्म करता है, लेकिन उसे दुख ही प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि भगवान ने संसार को दुखालय इसलिए बनाया ताकि जीव दुखों से परेशान होकर ईश्वर को याद करे और वापस प्रभु के चरणों में लौट सके।
सृष्टि रचना का वर्णन
कथावाचिका ने विस्तार से बताया कि कैसे ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई और उन्होंने सनत कुमारों, रुद्र देव तथा 10 मानस पुत्रों को प्रकट किया। उन्होंने मनु और शतरूपा के प्राकट्य और उनसे हुई पांच संतानों प्रियव्रत, उत्तानपाद, देवहूति, आकूति और प्रसूति की कथा सुनाई, जिनसे मैथुनी सृष्टि का विस्तार हुआ।
भगवान वराह अवतार
कथा के मुख्य प्रसंग में बताया कि जब पृथ्वी रसातल में डूब गई थी, तब ब्रह्मा जी की नासिका से भगवान वराह प्रकट हुए। प्रभु ने हिरण्याक्ष असुर का वध कर पृथ्वी को अपने दांतों पर उठाकर पुन: स्थापित किया। कथा के दौरान भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। आयोजन समिति ने बताया कि क्षेत्र में इस कथा को लेकर भारी उत्साह है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण धर्म लाभ ले रहे हैं।










