– राजधानी से : पंकज पटेरिया –
राजधानी भोपाल मे हुए बेहद कम यानी 43.8 मतदान ने आम नागरिकों सहित सियासद को भी चौका दिया है। भाजपा की ओर से इस मुद्दे को चिंतनीय बताया है। वहीँ कांग्रेस की ओर से यह सुना गया मतदाता तक प्रापर पर्चियां नहीं पहुंची। दूसरी आम वोटर की उदासीनता की वजह क्या होनी चाहिए? इस पर चिंतन मंथन किया जाना चाहिए। साथ ही मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी उन कारकों को भी तलाशना चाहिए जो कम मतदान के कारण बने। नाम ना देने की शर्त पर एक पूर्व पार्षद ने कहा कि मतदान कम प्रतिशत के पीछे आम जनता की बेरुखी के पीछे कोई अव्यक्त खीज ही वजह होनी चाहिए। लोग महंगाई जैसे कारण भी दबी जुबान से बताते है।
हालाकि प्रदेश शासन और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की लोग मुक्त ह्रदय से तारीफ करते हैं कि वे सीदे लोगों से जुड़ते संवाद करते हैं। उनके दुख दर्द को गहराई से समझते हैं और समस्या का निदान करने ठोस उपाय भी करते हैं। कुछ लोगों का कहना है यह स्थानीय मामला है। यहां प्रतिशत के कम की वजह स्पष्ट रूप से स्थानीय ही ढूंढनी चाहिए। प्रतिशत की कमी का कारण. स्थानीय परिवेश की धमनियों में पकड़ में आ जाएंगे। बहरहाल मतदान की समाप्ति के बाद मतदान केंद्रों के बाहर दोनों पक्षों के लोगों के चेहरों पर खुशी कर रंग देखा गया। कहीं पतली सी मायूसी की बदली नहीं दिखी।दोनों पक्ष जीत का दावा कर रहे हैं। भविष्य बताएगा कि भीषण जद्दोजहद, कसमकस, धुआंधार चुनाव प्रचार और एक दूसरे पर आरोपों की बमबारी के बाद विजयश्री के मुकुट की अधिकारी दोनों भाभियों में से कौन सी भाभी बनती है।
हर नर्मदे।

पंकज पटेरिया
वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार
ज्योतिष सलाहकार, भोपाल
9340244352 ,9407505651








