– राजधानी से पंकज पटेरिया :
अब जबकि मतदान का प्रतिशत मानसूनी हल्की बूंदाबांदी सा रहा। जाहिर है उदासी की थोड़ी सुरमई बदली तो मन पर छाई ही है। अपने अपने अंदाज में लोग कम फ़ीसदी के आरोपों की मिसाइलें इधर उधर दाग रहे हैं।यू यह भी एक सर्व विदित तथ्य है कि दोनों प्रत्याशी दमखम में यानि भाजपा की श्रीमति मालती राय और उधर कांग्रेस की विभा पटेल एक दूसरे से कम नहीं है सामाजिक राजनीतिक आर्थिक दृष्टि से खासा रोब रुतबा रखते हैं अपने अपने पार्टी में। आत्मीय संबोधन से भाभी जी पुकारी जाती हैं। इधर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी टीम द्वारा भाजपा प्रत्याशी मालती राय के पक्ष में धुआंधार प्रचार किया। उधर कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी श्रीमती विभा पटेल को जिताने का आव्हान किया।
तमाम शोर-शराबे के विराम के बाद बंद कमरा बैठकों का दौर भी आखरी रात चला। रत जगे चलें और नई रणनीति के तहत भूमिका तय की गई। दोनों तरफ जबरदस्त तामझाम तना। मतदाता का रुख और मुख अपने अपने पक्ष की और करने में सभी चुनावी उपक्रम किए गए। लेकिन कम मतदान की तस्वीर से चिंता की घटा जरूर घुमड़ आई है। किसके माथे सजेगा जीत का सहरा। इधर राजधानी में चुनाव में सियासी सूरमा मैदान मे मुस्देदी से डटे रहे तो दफ्तर से सायबर वीर चाक चौबंद मोर्चा संभाले रहे।
मौजूदा माहौल पर डा.इकबाल का यह शेर कहना मौजूद लगता है। रुखे रोशन के आगे शम्मा रखकर यह कहते हैं, उधर जाता है देखें यह इधर आता है परवाना। अभी आप कीजिए हम भी करें इंतजार क्योंकि किसी ने क्या सच कहा है। “पलको पर रुका है समुंदर खुमार का,कितना अजब नशा है इंतजार का।
नर्मदे हर।

पंकज पटेरिया
वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार
ज्योतिष सलाहकार
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