देवी देवताओं अवतार सिद्ध संत महात्माओं की पूजा उपासना साधना की निरंतरता के चलते अपने ईस्ट की कृपा से दिव्य शक्तियों का प्रसाद मिलता है। फिर भक्त शिष्य आदि पर भी जब-तब संकट के समय उनकी कृपा से रक्षा होती है। इसी तरह की घटनाएं परम सत्ता के प्रति हमें श्रद्धानत कर देती है। ऎसा ही प्रंसग होशंगाबाद का है। संत श्री धूनी बाले दादा(Shree Dhuni bale dadaji) जी के परम शिष्य पूज्य संत दुर्गा नन्द जी महाराज(Sant durga nand ji maharaj) जिनकी समाधि नर्मदा तट सिवनी मालवा के आबली घाट में है। दुर्गा नन्द जी को पुजारी जी भी कहते थे। वे तुरी अवस्था को प्राप्त कर चुके थे। लंबे समय तक पुजारी जी होशंगाबाद श्री धूनी बाले दादा जी के आश्रम दरबार धूनी में दादा जी की सेवा करते रहते थे बाद में पुजारी जी आबली घाट दादा जी के आश्रम में रहने लगे थे। आना-जाना होशंगाबाद बना रहता था। बहर हाल उनके ब्रम्हलीन होने के पहले की यह चमत्कारी घटना है। दुर्गा नन्द जी के शिष्य मेरे मित्र उपेन्द्र सिंह उर्फ मुन्नू भाई महाराज जी से भेंट करने आबली घाट आश्रम जाते रहते थे, ऐसी ही बरसात के दिन थे, पर पानी नहीं गिर था लिहाजा मुन्नू भैया मोटर सायकल से आबली घाट पहुंचे। शाम होने लगी तो उन्होंने पुजारी जी सेवापिस लौटने की आज्ञा मांगी, पुजारी जी ने भी साथ चलने का कहा, भैया ने मौसम को देखते उन्हें मना करने की कोशिश की। पर पुजारी जी कब मानने बाले थे। लिहाजा मोटर सायकल पर दोनों बैठ कर होशंगाबाद को चल दिए। हुआ बही जिसकी आशंका थी। जोर-जोर से बादल गरजने लगे, मूसलाधार बारिश शुरू हो गई सुनी सड़क धुप, अंधेरा, मुन्नू भाई ने महाराज जी से कही रुकने का कहा पर पुजारी जी ने चलते रहने का हुक्म दिया। और जोर से जय श्री दादा जी नाम लेकर बोले का डर रहो जे ले खुलगओ दादाजी को छाता और उन्होंने अपने दोनो हाथ उपर से सामने लाते हुए मुन्नू भाई के सिर तक फेर दिए। हैरानी की बात यह की सब तरफ पानी भयंकर गिर रहा लेकिन हम पर एक बूंद तक नहीं। करीब घंटे, डेढ़ घंटे बाद के इस रोमांच कारी यात्रा के बाद होशंगाबाद में एसपीएम की रोशनी दिखी तो जान में जान आई। मुन्नू भाई बताते मेरी अलग विस्मित स्थिति थी। लेकिन पानी गिर रहा था। हम भी सुरक्षित थे। होशंगाबाद आश्रम पहुंच कर धूनी पर माथा टेका, टिक्कड़ का प्रसाद खा कर गुरु देव जी का आशीर्वाद लेकर घर आ गया। दादा जी धूनी बाले दरबार मेरे बहनोई श्री तेजेश्वर मिश्र जी के घर मुझे भी पुजारी जी महाराज का सतत आशीर्वाद मिलता रहा। कुछ बरसो बाद पुजारी जी ब्रम्हलीन हो गये पर मुन्नू भाई से जब भी चर्चा होती हैं सब भाव विभोर हो जाते है। इस तरह के और भी प्रसंग है इनकी चर्चा फिर कभी।
पंकज पटेरिया(Pankaj pateria) वरिष्ठ कवि, पत्रकार
संपादक शब्द ध्वज, होशंगाबाद
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