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नर्मदा-तवा के संगम पर लगायी आस्था की डुबकी

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कोरोना की बंदिशें हटने पर हजारों श्रद्धालु पहुंचे बांद्राभान
होशंगाबाद/इटारसी। नर्मदा और तवा के पावन संगम स्थल बांद्रभान में कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले मेले को भले ही प्रशासन ने स्थगित किया हो, लेकिन आज बांद्राभान पहुंचे श्रद्धालुओं ने जता दिया है कि अपने धर्मकर्म पर वे किसी प्रकार का रोक पसंद नहीं करते। कोरोना की दो वर्ष की पाबंदी के बाद इस वर्ष जब मेला स्थगित करने की सूचना आयी तो काफी विरोध हुआ था। आखिरकार प्रशासन को स्नान की अनुमति देनी पड़ी। आज कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान करने सुबह से ही हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु तो अर्धकुम्भ जैसा नजारा था।
एक बात प्रशासन की तारीफ में यह है कि यहां व्यवस्थाएं काफी अच्छी की गई हैं। यातायात की दोपहर तक तो कोई परेशानी नहीं आयी। गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए बाकायदा फ्लैग लगाये गये हैं तो गोताखोर, सुरक्षा दस्ते भी मुस्तैद हैं। एक अनुमान के मुताबिक सुबह से दोपहर तक लगभग पचास हजार श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं।

ऐसा है बांद्राभान

19 it 6बांद्राभान होशंगाबाद शहर से करीब सात किलोमीटर दूर एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यहां पर मध्य प्रदेश की दो प्रमुख नदियों नर्मदा और तवा का संगम हुआ है। संगम स्थल बहुत ही सुंदर और विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां से विन्ध पर्वत का नजारा अत्यंत मनोरम लगता है। बांद्राभान में स्नान पर्व के समय बहुत ज्यादा भीड़ लगती है। बहुत ज्यादा लोग पवित्र नदियों में स्नान करने के लिए आते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालु प्रदेश के अनेक शहरों और ग्रामीण अंचल से बांद्राभान स्थित संगम स्थल पर स्नान करने आते हैं।

पक्की सड़क बन गयी है

वर्तमान में बांद्राभान जाने के लिए पक्की सड़क है। वर्षों पूर्व यहां लगने वाले मेले में श्रद्धालु कच्ची सड़क पर बैलगाड़ी, दोपहिया वाहन से लोग आते थे। कुछ चार पहिया वाहन और ग्रामीण अंचलों से लोग ट्रैक्टर-ट्राली से तथा आसपास के शहरों से बसों से लोग यहां पहुंचते थे। कार्तिक पूर्णिमा के दिन नर्मदा नदी और तवा नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। इसलिए यहां पर पूरे मध्यप्रदेश से लोग इस मेले में शामिल होने के लिए आते हैं। बांद्राभान में चारों तरफ रेत ही रेत है। तवा नदी का चौड़ाई यहां पर बहुत ज्यादा है।

अघोषित रूप से लग गया मेला

संगम स्थल पर हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर मेला लगता है और लाखों की संख्या में प्रदेशभर से श्रद्धालु दर्शन और स्नान के लिए आते हैं। मेले में हर प्रकार के सामान मिलते हैं। मेले में बहुत सारी दुकानें लगती हैं। मेले में दूर से आए हुए पर्यटकों के ठहरने के लिए भी सुविधा रहती है। बांद्राभान मेले के समय यहां पर बहुत सारे साधु संत भी आते हैं, जो यहां पर कथाएं एवं प्राचीन ग्रंथों का पाठ करते हैं। यहां पर लोग स्नान करते हैं और पुण्य कमाते हैं। बांद्राभान प्रकृति के बीच अत्यंत रमणीय स्थल है, यहां पॉजिटिव एनर्जी महसूस होती है।

बांद्राभान के विषय में

बांद्राभान के बारे में कहा जाता है, कि प्राचीन समय में यहां पर किसी राजा को श्राप मिला था, कि वह बंदर की तरह देखेगा। इसलिए वह अपने श्राप के कारण नर्मदा और तवा नदी के संगम पर आया और उसने तपस्या की। जिससे उसे उस श्राप से मुक्ति मिली और उसे मोक्ष को प्राप्त हुआ। इसी कारण इस जगह को बांद्राभान कहते हैं। बांद्रा का मतलब बंदर है। यह भी कहा जाता है कि यहां प्राचीन समय में पांडवों ने निवास कर उन्होंने यहां पर तपस्या की थी। यहां पर बहुत सारे ऋषि-मुनियों ने तपस्या की और मोक्ष को प्राप्त किया।

Rohit Nage

Rohit Nage has 30 years' experience in the field of journalism. He has vast experience of writing articles, news story, sports news, political news.

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