इटारसी। भारतीय संस्कृति की सदियों पुरानी और मंगलकारी परंपरा तुलसी विवाह मालवीयगंज के पंच देवता मंदिर में भव्य श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर, कार्तिक मास के पुण्य-स्नान का व्रत रखने वाली 100 से अधिक महिलाओं ने भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम जी के साथ माता तुलसी का विवाह (कन्यादान) कर, धर्म और भक्ति के अटूट बंधन को मजबूती दी।
पुण्य स्नान और कन्यादान का संकल्प कार्तिक मास हिंदू धर्म में सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है, जिसमें सूर्योदय से पूर्व स्नान और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष विधान है। इस व्रत को करने वाली महिलाओं ने स्वयं को तुलसी माता के पालक के रूप में मानते हुए, विवाह की संपूर्ण रस्में निभाईं। यह आयोजन मुख्य रूप से कन्यादान के महापुण्य के संकल्प को पूरा करने के लिए किया, जिसे धर्म ग्रंथों में अत्यंत फलदायी बताया गया है।
भावपूर्ण बारात और वार्डवासियों का स्वागत तुलसी विवाह की परंपरा को जीवंत करते हुए, भगवान शालीग्राम जी की एक भावपूर्ण बारात मंदिर से निकाली गई।
पारंपरिक साज-सज्जा : बारात में शामिल श्रद्धालु महिलाएं मंगल गीत गाती हुई चल रही थीं।
सजावट : तुलसी जी के पौधे को दुल्हन की तरह लाल चुनरी और आभूषणों से सजाया गया था। विवाह की रस्में मंदिर परिसर में वैदिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह संस्कार संपन्न हुआ। हल्दी, मेंहदी, गणेश पूजा और गठबंधन की सभी रस्में पूरी की गईं। प्रसाद वितरण के साथ, महिलाओं ने अपने परिवार की सुख, शांति और समृद्धि के लिए तुलसी माता और भगवान शालिग्राम से प्रार्थना की।








