हरदा डीएफओ की टीम ने सौंपी चौंकाने वाली रिपोर्ट
नर्मदापुरम/इटारसी। नर्मदापुरम वन विभाग एक बार फिर बड़ी गड़बड़ी को लेकर सुर्खियों में है। केसला विकासखंड के ताकू काष्ठागार डिपो से लाखों रुपए की बेशकीमती सागौन और अन्य प्रजाति की लकडिय़ों के गायब होने के मामले में सीसीएफ (मुख्य वन संरक्षक) अशोक कुमार द्वारा गठित नई जांच कमेटी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है।
तीसरी जांच में बड़ा खुलासा
पूर्व में दो एसडीओ (उप-विभागीय अधिकारी) स्तर के अधिकारियों द्वारा की गई जांच संदेह के घेरे में थी। तत्कालीन एसडीओ केएस सेंगर की पहली जांच असंतोषजनक रही, जिसके बाद सोहागपुर सामान्य वनमंडल की एसडीओ रहीं रचना शर्मा को दूसरी जांच सौंपी गई थी। रचना शर्मा की रिपोर्ट में लगभग 43 घन मीटर लकड़ी गायब होने की पुष्टि हुई थी। हालांकि, सीसीएफ अशोक कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए, हरदा उत्पादन डीएफओ (मंडला वन अधिकारी) नरेंद्र पांडवा के नेतृत्व में एक विशेषज्ञ टीम को तीसरी बार जांच की जिम्मेदारी सौंपी। सूत्रों के अनुसार, डीएफओ पांडवा की मौजूदगी में दो दिनों तक चली जांच के बाद कमेटी ने जो रिपोर्ट सौंपी है, वह पूर्व की सभी जांचों से बिल्कुल अलग है।
50 घन मीटर से अधिक लकड़ी गायब, कीमत 20 लाख से ज्यादा
सूत्रों का कहना है कि हरदा उत्पादन डीएफओ के नेतृत्व वाली जांच कमेटी ने पूर्व के 43 घन मीटर के आंकड़े को पार करते हुए 50 घन मीटर से ज्यादा (लगभग 10 से 12 घन मीटर अधिक) लकड़ी गायब होने की पुष्टि की है। गायब हुई इस बेशकीमती लकड़ी की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 20 लाख रुपए से अधिक बताई जा रही है। यह पूरा घटनाक्रम वर्ष 2023 से 2024 के बीच का है, जब ताकू काष्ठागार डिपो में उप-डिप्टी रेंजर बालाप्रसाद और बाद में रेंजर मनोहर वाडिवा पदस्थ थे।
जिम्मेदार कौन, और क्या होगी कार्रवाई?
इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी डिपो से लकड़ी गायब होने के मामले में डिपो का पूरा स्टाफ, तत्कालीन सेक्टर प्रभारी और सीधे तौर पर पदस्थ वनकर्मी जिम्मेदार माने जा रहे हैं। वन विभाग के आला अधिकारियों के लिए यह पता लगाना बड़ी चुनौती है कि सुरक्षा के व्यापक इंतजामों वाले डिपो से यह हेराफेरी आखिरकार हुई कैसे, क्योंकि बिना विभागीय मिलीभगत के इतनी बड़ी चोरी असंभव है। वन महकमा अब जिम्मेदार कर्मचारियों से इस लाखों रुपए के नुकसान की रिकवरी कर सकता है और उन्हें निलंबित करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, अक्सर देखा गया है कि बड़े अफसरों को बचाने के लिए छोटे कर्मचारियों पर गाज गिर जाती है, लेकिन इस बार सवाल यह है कि उस कार्यकाल में पदस्थ वरिष्ठ वन अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी या नहीं। नर्मदापुरम में लगातार बढ़ रहे भ्रष्टाचार और गबन के मामलों के बीच, दूसरे जिले के अधिकारी (हरदा डीएफओ) द्वारा जांच कराया जाना यह दर्शाता है कि स्थानीय अधिकारियों पर सीसीएफ का भरोसा कम हुआ है। उम्मीद है कि यह जांच सिर्फ लकड़ी चोरी तक सीमित न रहकर, विभाग को खोखला करने में जुटे बिचौलियों और दलालों पर भी अंकुश लगाने में सफल होगी।








