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एक स्कूल ऐसा जहां आज भी बच्चे पहनते है सफेद सर्ट, खाकी पेंट, सफेद टोपी

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1892 में हुई थी बुनियादी शाला की स्थापना, हर दिन याद किए जाते हैं बापू और उनके विचार

खिरकिया। हरदा जिले के खिडकिया में एक स्कूल ऐसा है जहां आज भी हर दिन बापू को याद कर पाठ पढाया जाता है। इतना ही नहीं यहां के हर बच्चें बापू यानि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के उसूलों पर चलते हैं। उनका पहनावा भी ऐसा ही है। बता दें कि यहां के बच्चें सफेद शर्ट, खाकी पेंट, सफेद लंबी टोपी पहने विद्यार्थी यह नजारा होता है। इस स्कूल का नाम है बुनियादी शाला। नगर सहित समूची तहसील में शिक्षा की नींव के रूप में जानी जाने वाली बुनियादी शाला छीपाबड़ में हर दिन महात्मा गांधी जी का पाठ पढ़ाया जाता है। इस तरह से यह शाला गांधी जी की स्मृति को चिर स्थाई बनाए है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्म दिवस 2 अक्टूबर पर यहां की गांधीगिरी अविस्मरणीय हो जाती है। आज भी यहां गांधीजी के आदर्शों को प्राथमिकता एवं गांधी पाठ पढ़ाया जाता है।

1982 में स्थापित शाला आज भी नगर को कर रहीं गौरवांवित
जानकारी अनुसार जनवरी 1892 में स्थापित शाला आज भी नगर को गौरवांवित कर रहा है। यहां के विद्यार्थियों द्वारा टोपी लगाकर शिक्षा ग्रहण की जाती है। बकायदा विद्यार्थियों द्वारा सफेद शर्ट, खाकी पेंट और उस सफेद लंबी टोपी यहां के विद्यार्थियों की शान है। इस विद्यालय में टोपी पहनने का प्रचलन सन 1960 से प्रारंभ हुआ। जो आज तक जारी है। यहां की शाला प्रबंधन इस प्रथा को लगातार जारी रखे है। आज भी इस विद्यालय में विद्यार्थियों द्वारा जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण की जाती है।

सूत काटने की प्रथा भी शुरू हुई
पढ़ाई के साथ स्वालंबन का प्रशिक्षण गांधी जी के प्रमुख सिद्धांत स्वालंबन की प्रेरणा हेतु इस विद्यालय में सूत काटने की प्रथा भी शुरू हुई। इस बुनियादी शाला में देश की आजादी के वर्ष 1947 से सूत काटने का कार्य भी प्रारंभ किया गया। जो यहां के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण स्वरूप था। लगभग 20 वर्ष चलकर 1967 तक यह कार्य जारी रहा। सूत काटने के उपयोग में आने वाले चरखा आज भी गांधीजी की वह कविता का स्मरण कराती रहती है कि मां खादी की चादर दे दे। मैं गांधी बन जाऊं इस आशय की प्रेरणा इस विद्यालय में अध्ययन कर रहे वे सभी विद्यार्थी ग्रहण कर रहे हैं। स्थापना वर्ष के ही दाखिल पंजी रजिस्टरए जन्म पंजी रजिस्टर आज भी इस विद्यालय में ऐतिहासिक धरोहर के रूप में मौजूद है। यह समूचे क्षेत्र का एक मात्र विद्यालय था। शिक्षक अरविंद राजपूत ने बताया आज भी विद्यालय में प्राचीन गतिविधियां का रिकार्ड एवं सामग्री विद्यालय में धरोहर के रूप मे मौजूद है।

टोपी और जमीन पर बैठने की प्रथा आज भी
यहां केे शिक्षकों का कहना है कि धरोहर के रूप में सुरक्षित रखा जाए भवन इस ऐतिहासिक महत्व के विद्यालय का भवन खंडहर हो रहा है। विद्यालय का प्राथमिक माध्यमिक से दर्जा बढ़ाकर हाईस्कूल तक भी किया जा चुका है। 125 वर्ष पुराने एतिहासिक भवन को गिराने के निर्देश दिए जा चुके हैं जबकि इस भवन को गिराने के बजाय संवारा जाना चाहिए। जिससे इस गांधीवादी विद्यालय की स्मृति नगर में मौजूद रहे। ढाई फीट मोटी दीवारों वाले इस भवन में दुरूस्तीकरण की आवश्यकता है। विद्यालय में टोपी लगाकर और जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करने की परंपरा को जारी रखा गया है। गांधीवादी शिक्षा के इस स्मारक को सुरक्षित रखे जाने के लिए पूर्व में उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया था।

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