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पथरोटा से सोहागपुर के ग्राम छेड़का के लिए निकली गो रूर्बन बस यात्रा

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प्रतिभागियों ने देखी खेतीबाड़ी, अनुभव शेयर किये

इटारसी। एक सप्ताह की गो रूर्बन यात्रा (Go Rurban trip) आज नेशनल हाईवे किनारे ग्राम पथरोटा से कटनी के लिए प्रारंभ हुई। यात्रा यहां के भारत कालिंग सेंटर (Bharat Calling Center) से प्रारंभ हुई जो आज पहले दिन ग्राम छेड़का सोहागपुर पहुंची और यहां रात्रि विश्राम के बाद गुरुवार को सलकनपुर होकर भोपाल के रास्ते कटनी के लिए निकलेगी। इस बस यात्रा में यहां से करीब 18 प्रतिभागी शामिल हुए हैं, जो दिल्ली, मप्र, उत्तरप्रदेश, केरल, महाराष्ट, हरियाणा सहित देश के अन्य राज्यों से हैं।

8 दिनों की यह यात्रा 25 नवंबर को कटनी के ग्राम बिजौरी में मानव जीवन विकास समिति पहुंचेगी। 25 नवंबर से 28 नवंबर तक मानव जीवन विकास समिति के परिसर में एक कैंप आयोजित किया जाएगा। आज दोपहर में पथराटा इटारसी से निकल कर यात्रा गांधी ग्राम, छेड़का, सोहागपुर पहुंची और अगले दिन वहां से आगे बढ़ेगी।

विभिन्न प्रांतों के प्रतिभागी शामिल
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गो रूर्बन यात्रा के विषय में जानकारी देते हुए एकता परिषद के अनीस ने कहा कि दुनिया एकदूसरे से कैसे जुड़े, स्थानीय अर्थव्यवस्था का आज की नौजवान पीढ़ी समझे, उसकी समझ विकसित हो, यह उद्देश्य लेकर यह यात्रा प्रारंभ की है। इनमें देशभर के विभिन्न प्रांतों से आए प्रतिभागी शामिल हुए हैं।

रूरल और अर्बन को कनेक्ट करता
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भारत कालिंग के संदीप मेहतो ने बताया कि रूरल और अर्बन को यह कनेक्ट करता है। अंश हैप्पीनेस, एकता परिषद और भारत कालिंग इसमें शामिल है। गांव से शुरुआत करना था, तो पथरोटा से इसकी शुरुआत की है। यहां बच्चों ने लोकल इकॉनोमी को कैसे चलाया जाता है, तीन स्थानों पर जाकर देखा।

हमारे लिए नया अनुभव है
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अंश हैप्पीनेस सोसायटी भोपाल की उजाला सिंह उत्तरप्रदेश की निवासी हैं जो इन दिनों भोपाल में हैं। उन्होंने अपने अनुभव शेयर किये। उन्होंने आज फील्ड विजिट करके जाना कि गुलाब की खेती कैसे होती है। वाटर सिस्टम के विषय में यहीं आकर जाना, यह उनके लिए नया अनुभव था। सारा परिवार कैसे एकसाथ खेती करके एकदूसरे से कनेक्ट रहता है।

हमने कृषि की वैल्यू समझी है
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माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल के कृष्णानंद पाठक ने कहा कि हम अहिंसक अर्थ व्यवस्था को समझने निकले हैं। यहां हमने कृषि की वैल्यू समझी है, कैसे एक किसान मेहनत करता है, कैसे फसल को तैयार करता है, तब जाकर हमारे पास तक भोजन के रूप में अनाज पहुंचता है।

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