इटारसी। संसार की समस्त जीवात्माओं के जीविकोर्जन के लिए परब्रह्म परमात्मा ने एक नियमावली बनाई जिसे सनातन संस्कृति के रूप में स्थापित किया परंतु द्वापर युग में जब यह सनातन संस्कृति क्षीण होने लगी तो उसकी रक्षा के लिए परमात्मा ने श्री कृष्ण अवतार धारण किया। उक्त उद्गार श्री विश्व स्वरूपानंद गिरि महाराज ने इटारसी में व्यक्त किये।
जगद्गुरु आदि शंकराचार्य के अनुयाई ब्रह्मलीन श्री सुंदर गिरी महाराज की पावन स्मृति में शंकराचार्य समुदाय द्वारा श्री वृंदावन गार्डन में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह के चतुर्थ दिवस में उपस्थित श्रोताओं के समक्ष स्वामी स्वरूपानंद ने श्री कृष्ण जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए की रामराज वाले त्रेता युग संपन्न होने के पश्चात जब द्वापर युग प्रारंभ हुआ, तभी परमात्मा ने जान लिया था कि इस युग में कंस वध, दुर्योधन जैसे आसुरी प्रवृत्ति के सत्ता संचालक होंगे जो अपनी असत्य कामनाओं को पूर्ण करने के लिए सत्य रूपी सनातन संस्कृति को नष्ट करने का कार्य करेंगे, अत: इनका अंत उन्हीं की कुनीतियों से करने के लिए ही परमात्मा ने श्री कृष्ण के रूप में लीला अवतार धारण किया।
इसके साथ ही स्वामी जी ने श्रीमद् भागवत जी के माध्यम से समुद्र मंथन सहित अन्य प्रसंगों का भी भक्तिमय वर्णन किया। चतुर्थ दिवस की कथा का मुख्य आकर्षण रहा श्री कृष्ण जन्मोत्सव जो सुंदर चलचित्र झांकी के रूप में मनाया गया इस अवसर पर अनेक मधुर भजन भी प्रस्तुत किए गए जिन पर श्रोता भक्ति में पूरे समय झूमते रहे कथा के प्रारंभ में क्षेत्र के समाज सेवी मनीष सिंह ठाकुर मध्य प्रदेश शासन के पूर्व मंत्री प्रताप सिंह उईके मध्य प्रदेश के भागवताचार्य गौरव ललित किशोर दधीचि इनकम टैक्स कमिश्नर विजय कुमार सोनी के साथ ही कथा यजवान श्याम गिरी डॉक्टर पांचाल एवं राजेंद्र गिरी ने प्रवचन करता स्वामी विश्व स्वरूपानंद जी के साथ ही अमेरिका से आए स्वामी सदानंद जी महाराज मुंबई के स्वामी शिव शंकारानंद गिरी महाराज का पुष्पहारों से स्वागत किया।










