- शिव महापुराण के चतुर्थ दिवस देवी रत्नमणि ने समझाया शिव-शक्ति मिलन का आध्यात्मिक रहस्य
इटारसी। पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में जारी भव्य शिव महापुराण कथा के चौथे दिन शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग श्रद्धा और उल्लास के साथ सुनाया गया। कथावाचक देवी रत्नमणि द्विवेदी ने शिव विवाह की व्याख्या करते हुए कहा कि यह केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि असीम चेतना (शिव) और दिव्य ऊर्जा (शक्ति) के मिलन का उत्सव है।
शिव विवाह के गूढ़ अर्थ
देवी जी ने कहा कि शिव परम वैरागी हैं, जिन्हें माता पार्वती ने अपनी भक्ति से गृहस्थ जीवन की ओर मोड़ा। यह दर्शाता है कि साधना और परिवार में कोई विरोधाभास नहीं है। माता पार्वती की कठोर तपस्या सिखाती है कि ईश्वर की प्राप्ति बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि आंतरिक दृढ़ता से होती है। शिव की बारात में भूत-प्रेतों की उपस्थिति और पार्वती द्वारा उन्हें स्वीकार करना यह संदेश देता है कि आध्यात्मिक जगत में बाहरी रूप-रंग का कोई महत्व नहीं है, केवल आत्मा का सौंदर्य महत्वपूर्ण है।
कथा के दौरान जब शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग आया, तो श्रद्धालु झूम उठे। कार्यक्रम के आयोजक मेहरबान चौहान ने बताया कि 108 फीट ऊंची शिव प्रतिमा की छाया में चल रही इस कथा में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। विवाह के उपलक्ष्य में मंदिर समिति द्वारा विशेष सजावट की गई और भगवान शिव व माता पार्वती की भव्य आरती उतारी गई।









