- अखिलेश शुक्ला, सेवा निवृत्त प्राचार्य, ब्लॉगर, लेखक

आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे सितारे की, जिसने सिल्वर स्क्रीन पर अपनी जबरदस्त एक्शन और कॉमेडी के दम पर दर्शकों के दिलों पर राज किया। लेकिन उसकी निजी ज़िंदगी का एक चैप्टर उसके फिल्मी करियर से भी ज़्यादा चर्चित रहा। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं महान अभिनेता धर्मेन्द्र जी की, जिनका हाल ही में 24 नवंबर को स्वर्गवास हो गया। उनकी स्मृति को नमन करते हुए, आज हम जानेंगे उनकी ज़िंदगी के एक ऐसे पहलू के बारे में, जिसने एक पत्नी की निस्वार्थ प्रेम और समझदारी की मिसाल कायम की। यह कहानी है धर्मेन्द्र जी की पहली पत्नी, प्रकाश कौर जी की, जिनके एक बयान ने पूरे विवाद को ही एक नया मोड़ दे दिया था।
जब एक पत्नी ने अपने पति के ‘खिलाफ’ होते तूफान को किया शांत
1970 और 80 का दशक था। बॉलीवुड में धर्मेन्द्र और ‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी की जोड़ी सुपरहिट साबित हो रही थी। स्क्रीन पर उनकी केमिस्ट्री जल्दी ही रियल लाइफ में बदल गई। और फिर वह खबर आई जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। खबर थी कि धर्मेन्द्र ने अपनी पहली पत्नी प्रकाश कौर और चार बच्चों (सनी, बॉबी, अजीता और विजेता) को छोड़कर हेमा मालिनी से शादी कर ली है। यहीं से शुरू हुआ एक ऐसा विवाद, जिसने धर्मेन्द्र और हेमा दोनों को लोगों के निशाने पर ला दिया।
मीडिया में धर्मेन्द्र के खिलाफ ऐसी खबरें छपने लगीं, जैसे वह कोई अपराधी हों। उन पर धोखेबाज़, वुमनाइज़र जैसे तमगे लगाए जाने लगे। हेमा मालिनी भी इस आलोचना का शिकार हुईं। ऐसा लग रहा था जैसे पूरा देश उन दोनों को सजा सुना रहा हो। लेकिन तभी, एक ऐसी आवाज़ उठी जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी। यह आवाज़ थी धर्मेन्द्र की पहली पत्नी, प्रकाश कौर जी की।
“कोई भी मर्द हेमा मालिनी को चुनना चाहेगा”
जब धर्मेन्द्र पर हमले का दौर चरम पर था, तब प्रकाश कौर जी ने मीडिया के सामने आकर एक ऐसा बयान दिया, जिसने सबको हैरान कर दिया। उन्होंने कहा, “सिर्फ मेरे पति ही नहीं, कोई भी मर्द मेरी जगह हेमा मालिनी जैसी औरत को चुनना चाहेगा। फिल्म इंडस्ट्री में कई लोगों के दूसरे अफेयर हैं। कई लोग हैं जो दूसरी शादी भी कर रहे हैं। तो सिर्फ मेरे पति के बारे में ही बातें क्यों की जा रही हैं। उन्हें ही वुमनाइज़र क्यों बोला जा रहा है।”
इस एक बयान ने सारे समीकरण बदल दिए। प्रकाश कौर जी ने न सिर्फ धर्मेन्द्र का बचाव किया, बल्कि उन्होंने स्थिति को एकदम अलग नज़रिए से देखने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने न तो धर्मेन्द्र पर कीचड़ उछाला और न ही हेमा मालिनी को कोई गलत शब्द कहे। बल्कि, उन्होंने हेमा की खूबसूरती और आकर्षण को स्वीकार किया। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे कई मामले हैं, फिर सिर्फ धर्मेन्द्र को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है?
प्रेम, त्याग और समझदारी की मिसाल
प्रकाश कौर जी का यह बयान सुनकर लोग दंग रह गए। एक पत्नी, जिसे उसके पति ने छोड़ दिया हो, वह उसके बचाव में खड़ी हो गई। यह कोई आम बात नहीं थी। इस घटना ने प्रकाश कौर जी की इज्ज़त लोगों के दिलों में कई गुना बढ़ा दी। उन्होंने जिस समझदारी और परिपक्वता का परिचय दिया, वह काबिल-ए-तारीफ है।
उन्होंने हेमा मालिनी के लिए भी सहानुभूति जताते हुए कहा था, “मैं समझ सकती हूं कि हेमा मालिनी इस वक्त किस दौर से गुज़र रही हैं। हेमा भी अपने परिवार और रिश्तेदारों का सामना मुश्किल से ही कर पा रही होंगी। मैं अगर उनकी जगह होती तो ऐसा कभी ना करती। एक औरत होने के नाते मैं उनकी भावनाओं को समझ सकती हूं। लेकिन मैं पत्नी और एक मां भी हूं। इसलिए ऐसा करने की इजाज़त मैं उन्हें कभी नहीं दूंगी।”
इस वक्तव्य में एक पत्नी और माँ का दर्द भी था और एक औरत की दूसरी औरत के प्रति समझ भी। उन्होंने साफ कर दिया कि वह स्थिति को समझ तो सकती हैं, लेकिन उसे स्वीकार नहीं कर सकतीं।
धर्म बदलने का मामला: एक रहस्य
इस पूरे प्रकरण में एक और पहलू जुड़ा था, वह था धर्म बदलने का। कहा जाता है कि धर्मेन्द्र अपनी पहली पत्नी को तलाक दिए बिना ही हेमा मालिनी से शादी करना चाहते थे। चूंकि हिंदू धर्म एक से ज्यादा शादी की इजाज़त नहीं देता, इसलिए उन्होंने इस्लाम धर्म अपनाया और अपना नाम दिलावर खान रख लिया। इसके बाद साल 1979 में उन्होंने हेमा मालिनी से शादी कर ली। हालाँकि, धर्मेन्द्र और हेमा मालिनी ने हमेशा धर्म बदलने की बात से इनकार किया। यह मामला आज भी एक रहस्य बना हुआ है।
एक मजबूत माँ की भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम के बाद, प्रकाश कौर जी ने खुद को मीडिया की नज़रों से दूर रखा। वह अपने दोनों बेटों, सनी देओल और बॉबी देओल के साथ रहने लगीं। उन्होंने अपने बच्चों को एक मजबूत माँ की तरह संभाला और उन्हें बॉलीवुड में सफलता की बुलंदियों तक पहुँचाया। उन्होंने कभी भी अपने दर्द को सार्वजनिक मंच पर नहीं आने दिया और अपनी गरिमा बनाए रखी।
निष्कर्ष: प्रेम की विजय, द्वेष की हार
धर्मेन्द्र जी के जाने के साथ ही बॉलीवुड का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया है। लेकिन उनकी ज़िंदगी की यह कहानी हमें बहुत कुछ सिखाती है। यह कहानी सिर्फ एक प्रेम प्रसंग की नहीं, बल्कि मानवीय संबंधों की जटिलताओं, एक पत्नी के निस्वार्थ प्रेम और अतुल्य समझदारी की भी है।
प्रकाश कौर जी ने जो किया, वह आम औरत के बस की बात नहीं है। उन्होंने दिखाया कि सच्चा प्यार कभी द्वेष में नहीं बदलता। उन्होंने अपने दर्द को अपनी ताकत बनाया और अपने बच्चों के लिए एक मजबूत स्तंभ की भूमिका निभाई। उनका बयान न सिर्फ धर्मेन्द्र जी के लिए, बल्कि पूरे परिवार के लिए एक रक्षा कवच बन गया।
आज धर्मेन्द्र जी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी फिल्में और उनकी ज़िंदगी की यह अनोखी कहानी हमेशा हमें याद दिलाती रहेगी कि ज़िंदगी के उलझे हुए धागों में भी, प्रेम, सम्मान और समझदारी ही वह हल है जो हर गाँठ को खोल सकता है। प्रकाश कौर जी का व्यक्तित्व हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन समय में भी अपनी गरिमा न खोना ही सबसे बड़ी जीत है।
धर्मेन्द्र जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।










