इटारसी। भगवान बिरसा मुंडा शासकीय महाविद्यालय सुखतवा में उस समय केरल की समृद्ध संस्कृति जीवंत हो उठी, जब भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत स्पीक मैके चैप्टर इटारसी के सहयोग से कथकली कलाकारों ने अपनी जादुई प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में कलाकारों की जुगलबंदी ने विद्यार्थियों और स्टाफ को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मौन भाव से रामायण-महाभारत का चित्रण
कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. नीता राजपूत, स्पीक मैके समन्वयक सुनील बाजपेई और राष्ट्रपति से संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त प्रख्यात कलाकार कोट्टककल नंदकुमारुन नायर द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मुख्य प्रस्तुति के दौरान कलाकारों ने बिना बोले, केवल चेहरे के हाव-भाव (मुखज अभिनय) और हाथों की मुद्राओं (हस्त लक्षण) के जरिए नृत्य की बारीकियों को समझाया। विस्तृत वेशभूषा और विशिष्ट श्रृंगार में सजे कलाकारों ने जब मंच पर पौराणिक प्रसंगों को जीवंत किया, तो पूरा हॉल तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा।
इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. नीता राजपूत ने कहा कि कथकली 400 साल पुरानी शास्त्रीय नृत्य परंपरा है। यह मौन रहकर भी पुराणों, महाभारत और रामायण की कथा कहने की एक अद्भुत और प्रभावशाली विधा है। कोट्टककल नंदकुमारुन नायर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त इस कलाकार ने विद्यार्थियों को नृत्य की तकनीकी खूबियों और इसके सांस्कृतिक महत्व से रूबरू कराया।
संचालन डॉ. सौरभ तिवारी ने किया, जबकि अंत में श्रीमती संध्या उपाध्याय ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। इस सांस्कृतिक समागम में महाविद्यालय का समस्त शैक्षणिक स्टाफ और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे, जिन्होंने भारतीय शास्त्रीय कला के इस अनूठे संगम का आनंद लिया।










