नर्मदापुरम। मप्र राज्य शिक्षा शैक्षणिक संवर्ग सेवा एवं भर्ती नियम (MP State Education Academic Cadre Service and Recruitment Rules) 2018 अंतर्गत पद उच्च माध्यमिक शिक्षकों (Higher Secondary Teachers) की मूल समस्याओं के निराकरण के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी (District Education Officer) को एक ज्ञापन दिया गया है। ज्ञापन में बताया है कि मप्र की स्कूल शिक्षा व्यवस्था (School Education System) में लगे हुये स्कूल शिक्षा एवं जनजातीय विभाग अंतर्गत हायर सैकंड्री स्कूलों के उच्च माध्यमिक शिक्षक विगत 25 वर्षों से एक ही पद पर रहकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
प्रदेश के समस्त उच्च माध्यमिक शिक्षकों की प्रमुख मांग है कि उच्च माध्यमिक शिक्षकों की वरिष्ठता सूची का निर्धारण प्रथम नियुक्ति दिनांक शिक्षा कर्मी/संविदा से किया जाकर सूची अविलंब जारी की जाये। हाल में ही जो सूची लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल (Directorate of Public Education Bhopal) के आदेश में वरिष्ठता का निर्धारण अध्यापक संवर्ग के संविलयन दिनांक को माना गया है जो न्यायोचित नहीं है। 1998 की भर्ती प्रक्रिया में शिक्षाकर्मी वर्ग 01, 2001, 2002, 2003 संविदा शिक्षक वर्ग 01 वर्ष 2006, 2007 संविदा शिक्षक वर्ग 01 एवं अध्यापक संवर्ग में वरिष्ठ अध्यापक एवं नये शिक्षक संवर्ग राज्य शिक्षा सेवा एवं भर्ती नियम 2018 को पद उच्च माध्यमिक शिक्षक को व्यख्याता के समकक्ष रखा गया है।
व्याख्याता संवर्ग के समान उच्च माध्यमिक शिक्षकों को नियमानुसार 10/20/30 वर्ष पूर्ण होने पर समयमान वेतन शीघ्र दिया जाये, सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति दिनांक शिक्षाकर्मी/ संविदा शिक्षक वर्ग 01 से ही की जाए। यह भी कहा है कि पूर्व में पदोन्नति नीति न होने के कारण 1998 से आज दिनांक तक लगभग 25 वर्ष पूर्ण होने पर पदोन्नति से वंचित रखा गया। जो कि न्यायिक सिद्धान्तों के प्रतिकूल होकर शासकीय सेवा अधिकारों का हनन है। वर्तमान में उच्च पद प्रभार की प्रक्रिया प्रचलन में है, अत: वरिष्ठता के आधार पर हाईस्कूल एवं हायर सैकंड्री स्कूल के प्राचार्य के उच्च पद का प्रभार व्याख्याता एवं उच्च माध्यमिक शिक्षको को संयुक्त रूप से दिया जाना था। परंतु उच्च माध्यमिक शिक्षको के साथ न्याय नहीं किया गया।
उच्च माध्यमिक शिक्षकों को समयमान वेतनमान प्रदान करने के साथ-साथ अविलंब प्राचार्य पद पर उच्च पद का प्रभार दिया जाकर उच्च माध्यमिक शिक्षकों के साथ न्याय किया जाना आवश्यक है। यदि ऐसा नहीं किया तो उच्च माध्यमिक शिक्षकों के साथ अन्याय होगा जिससे मजबूर होकर उच्च माध्यमिक शिक्षक संघ को न्यायालय की शरण में जाने को मजबूर होना पड़ेगा। अत: उपरोक्त मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक निर्णय कर उच्च माध्यमिक शिक्षको को समयमान वेतनमान एवं प्राचार्य पर उच्च पद प्रभार दिये जाने के उचित निर्देश प्रदान करें।