इटारसी। तृतीय अपर जिला न्यायालय इटारसी के न्यायाधीश आदित्य रावत ने बिहारी कालोनी निवासी आरोपी संदीप साहू को विवाहिता महिला के साथ छेड़छाड़ करने और अपराधिक अभित्रास के साथ उसकी लज्जा भंग करने का दोषी पाते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 के अपराध में एक वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक हजार रुपए के अर्थदंड से तथा धारा 75(2) बीएनएस में एक वर्ष के सश्रम कारावास एवं एक हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किए जाने का दंडादेश पारित किया है।
अर्थदंड अदा नहीं करने पर आरोपी को दोनों धाराओं में क्रमश: एक-एक माह का सादा कारावास और भुगताया जाएगा। दोनों सजाए साथ साथ चलेगी। इस अपराध में आरोपी 22 दिन जेल में बंद रहा था। प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से बारह गवाहों को परीक्षण किया गया था। शासन की ओर से पैरवी करने वाले अपर लोक अभियोजक राजीव शुक्ला ने बताया कि 19 जुलाई 2024 को फरियादिया ने थाना पथरौटा में उपस्थित होकर एक लिखित आवेदन दिया था जिसमें उसने लिखा था कि वह 15 जुलाई 2024 को दोपहर ढाई बजे अपने काम से शासकीय प्राथमिक विद्यालय गई थी, जहां पर आरोपी संदीप साहू ने बात नहीं करने पर से बहस शुरू कर दी थी।
जब वह पथरोटा तरफ आ रही थी तब आरोपी ने उसे पेट्रोल पंप पर रोककर उसके साथ हाथ मुक्कों से मारपीट की। फरियादिया जब रिपोर्ट लिखाने थाना पथरोटा तरफ जाने लगी तब आरोपी ने उसके पास मोटर साइकिल से आकर उसके साथ ही थाने जाने की बात कहते हुए बोला कि वह अब थाने पर ही बात कर लेगा। इस बात पर फरियादी उसकी गाड़ी पर बैठ गई। आरोपी ने उसे थाने पर ले जाने कि बजाय कीरतपुर रोड पर ले गया और छेड़छाड़ की और धमकी दी कि उससे शादी नहीं की तो उसके बच्चे को मार देगा। फरियादी उसकी गाड़ी पर से कूद गई जिससे उसके सिर, हाथ, पैर एवं पीठ पर चोट लगी थी। आरोपी ने उसे अपनी गाड़ी पर बिठाकर सरकारी अस्पताल ले गया और वहां उसे भर्ती कराया था।
फरियादी के लिखित आवेदन पत्र पर से थाना पथरोटा में आरोपी के खिलाफ अपराध धारा 74,75,115(2),351(2), बी एन एस दर्ज किया था। न्यायाधीश आदित्य रावत ने फैसले में लिखा है कि फरियादी ने बताया है कि वह दो बच्चों की मां है और उसका विवाह सन् 2008 में हुआ था। उक्त बात की जानकारी होने के बाद भी आरोपी ने फरियादी की लज्जा भंग करने के आशय से उसके साथ आपराधिक बल प्रयोग किया और लैंगिक उत्पीडऩ किया। उक्त तथ्य सहित वर्तमान मामले की संपूर्ण परिस्थितियों को देखते हुए एवं समाज पर पडऩे वाले प्रभाव को देखते हुए आरोपी संदीप साहू को दंडित किया जाता है। आरोपी को जेल नहीं भेजा गया है, उसे एक माह के लिए जमानत मिली है।








