झरोखा: पंकज पटेरिया
मशहूर सिने अभिनेता राजकुमार आज जिंदा होते तो बेखटके अपनी खनकदार आवाज में इशारा करते कहते जॉनी आपके हाथ में एक खतरनाक हैंड ग्रेनड है, कोई टेनिस का बॉल नहीं, फट जाएगा तो चीथड़े बगर जायेगे। या आप इसका इस्तमाल पूरे होशो हवास में कीजिए। ये बेहद जरूरी काम की चीज है और खतरे का पुलिंदा है। जाहिर इन चंद लाइन में सर्व व्यापक या यूं कहे घर-घर मोबाइल, कर-कर मोबाइल की तारीफ हैसियत ओर मिजाज हमारे सामने साफ उजागर हो जाता है।
यकीनन मोबाइल अब हमारे जीवन का जरूरी हिस्सा हो गया। सब कुछ उस पर आश्रित हो गया है। वह सुलाता है, बहलता है, जानकारी देता है, भागती दौड़ती जिंदगी की आपाधापी के कारण समय अभाव में बहुत से घर बाहर के कामो को निपटाने में मददगार है। कहने का आशय बदले दौर में मोबाइल नहीं हो तो आदमी अपने को लाचार, बेजार, बेवश ओर जड़वत महसूस करता है। बहुत सारे एप मुसीबत की घड़ी के ज्ञान विज्ञान की नई ताजा जानकारी के लिए यह एक भरोसेमंद साथी के रूप 24 घंटे हमारे साथ है। लेकिन दूसरी ओर इसका पहलू इसके टार्च की रोशनी में आपको अपनी आंखे बन्द नहीं कर लेना है। आपके विवेक की आंखे सदा खुली रहना चाहिए। वर्ना इसकी रंगीन ग्लैमर भरी दुनिया में एक बार जो आप ने पैर रख दिए तो एक अंधी सुरंग में आप बदहवाश भटकने को मजबूर हो जाते है। या किसी आकर्षण, मोह, लालच के शिकार होकर भयानक आफत के ऐसे चक्रव्यूह में फंस जाते कि बाहर निकलना नामुमकिन हो जाता। निकल भी गए तो यही हर आदमी कहता है, सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या हुआ। लूटने पीटने के बाद हासिल कुछ नहीं रहता, सिर्फ गालियां जमाने भर से मिलती।
लिहाजा इसके इस्तेमाल में पागल न हो जाए, आज रिश्तों में दूरी मां, बाप, भाई, बहन,पति पत्नी बच्चे सब मोबाइल ने बांट दिए है। टोकाटाकी बुरी लगती, रिश्तों की मिठास तो यू भी सूखती जा रही, कड़वाहट बढ़ने लगी। डोंट डिस्टर्ब का जुमला छोटे बडे दागने लगे है। इसलिए सब स्वाहा हो जाए जागना होगा। विवेक की चाक चौबंद रहकर खोले रखे। मोबाइल की प्राथमिकता निश्चित कर इस्तमाल करे। तो हम राजकुमार साहब का जुमला उधार लेकर फक्र से कह सकते है। जॉनी ये बहुत काम की चीज है वफ़ादार दोस्त है। नर्मदे हर।

पंकज पटेरिया (Pankaj Pateria) संपादक शब्द ध्वज,
ज्योतिष सलाहकार, वरिष्ठ पत्रकार कवि
9893903003, 9407505691









