इटारसी। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस, 28 फरवरी के उपलक्ष्य में भारत सरकार के नेशनल अवार्ड से सम्मानित सारिका घारू ने मध्य प्रदेश के दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में एक विशेष प्रेरणा कार्यक्रम का आयोजन किया। सारिका ने इस अवसर पर वैज्ञानिक सशक्तिकरण में जनजातीय महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए उन्हें आधुनिक विज्ञान की मुख्यधारा से जोडऩे का आह्वान किया।
कैरियर के लिए किशोरियों को किया प्रेरित
सारिका घारू ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की किशोरियों के बीच संवाद करते हुए साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स को अपने कैरियर के रूप में चुनने के लिए प्रेरित किया। उनका मानना है कि जब तक इन क्षेत्रों की वैज्ञानिक प्रतिभाओं को उचित मंच और प्रोत्साहन नहीं मिलेगा, तब तक विकसित भारत का सपना अधूरा रहेगा।
विज्ञान में महिलाएं: इस वर्ष की विशेष थीम
सारिका ने बताया कि इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम ‘विज्ञान में महिलाएं : विकसित भारत को गति देने वाली’ रखी गई है। उन्होंने कहा बड़े सभागृहों में कार्यक्रम आयोजित करने के बजाय जमीनी स्तर पर जाकर विज्ञान के प्रति लोगों को आकर्षित करना अधिक महत्वपूर्ण है। जनजातीय क्षेत्रों में नवाचार की कमी नहीं है, बस उन्हें आधुनिक रिसर्च सेंटर्स तक पहुंचने का मार्ग दिखाने की आवश्यकता है।
लोक कला के माध्यम से विज्ञान का प्रचार
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि विज्ञान जैसे जटिल विषय को समझाने के लिए लोक कला का सहारा लिया गया, जिससे आदिवासी किशोरियों ने सहजता से वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझा।
क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय विज्ञान दिवस?
सारिका घारू ने छात्र-छात्राओं को जानकारी दी कि महान भारतीय भौतिक वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर वेंकट रमन ने 28 फरवरी 1928 को अपनी ऐतिहासिक खोज ‘रमन प्रभाव, की घोषणा की थी। इसी उपलब्धि की स्मृति में 28 फरवरी 1987 से पूरे देश में प्रतिवर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है।









