इटारसी। धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर साहिबजादों की स्मृति में आज भगवान बिरसा मुंडा शासकीय महाविद्यालय सुखतवा में ‘वीर बाल दिवस’ का गरिमामयी आयोजन किया गया।
राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में वक्ताओं ने साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह के अदम्य साहस की गाथा साझा की।
दीवार में चुनवा दिए गए, पर झुके नहीं
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. नीता राजपूत के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. प्रवीण कुशवाहा ने बताया कि किस तरह वर्ष 1705 में मात्र छोटी सी आयु में साहिबजादों ने मुगलों के अत्याचार के सामने झुकने के बजाय शहादत को चुना। धर्म परिवर्तन के दबाव को ठुकराने पर उन्हें जिंदा दीवार में चुनवा दिया गया था, जो इतिहास में वीरता की सबसे बेमिसाल मिसाल है।
इतिहास और महत्व पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान डॉ. महेंद्र चौधरी ने जानकारी दी कि इन वीर सपूतों की शहादत की खबर सुनकर उनकी दादी माता गुजरी ने भी अपने प्राण त्याग दिए थे। उन्होंने यह भी बताया कि भारत सरकार ने वर्ष 2022 में इन महान आत्माओं के सम्मान में हर साल 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाने की ऐतिहासिक घोषणा की थी, ताकि युवा पीढ़ी इनके बलिदान से प्रेरणा ले सके।
एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. राधा आशीष पांडे के निर्देशन में संपन्न हुए इस कार्यक्रम में तकनीकी सहायक आयुष सादराम सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति और नैतिक मूल्यों का संचार करना था।









