- ग्राम तारारोड़ा में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
इटारसी। समीपस्थ ग्राम तारारोड़ा में महिला मंडल द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर कथावाचिका देवी रत्नमणि द्विवेदी ने निंदा रस के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने श्रद्धालुओं को सचेत करते हुए कहा कि दूसरों की बुराई या निंदा करना केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक अपराध है जो व्यक्ति के वर्षों के संचित पुण्यों को पल भर में नष्ट कर देता है।
कथा के मुख्य अंश
पुण्यों का हस्तांतरण : देवी जी ने बताया कि आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, निंदा करने वाले के पुण्यों का फल उस व्यक्ति को मिल जाता है जिसकी बुराई की जा रही है, और निंदा करने वाला अनजाने में ही सामने वाले के पापों का भागी बन जाता है।
मानसिक और आत्मिक पतन : निंदा से हृदय में ईष्र्या और नकारात्मकता जन्म लेती है, जिससे मानसिक शांति भंग होती है। बार-बार दूसरों के अवगुणों की चर्चा करने से वे अवगुण धीरे-धीरे निंदा करने वाले के स्वभाव का हिस्सा बन जाते हैं।
समय की बर्बादी : उन्होंने भक्तों को प्रेरित किया कि अनमोल समय को दूसरों की बुराई में नष्ट करने के बजाय ईश्वर की भक्ति और आत्म-चिंतन में लगाएं।
महिला मंडल का सराहनीय आयोजन
तारारोड़ा के महिला मंडल के तत्वावधान में आयोजित इस भक्तिमय आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु सम्मिलित हुए। देवी रत्नमणि की ओजस्वी वाणी और पौराणिक प्रसंगों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।









