इटारसी। शहर के दयाल मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पताल में इलाज के दौरान हुई नीरज राजपूत की मृत्यु के मामले में जिला स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट से असंतुष्ट होकर मृतक के पिता धनपाल सिंह राजपूत ने अब न्याय के लिए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जाने का निर्णय लिया है।
क्या है पूरा मामला?
जुलाई 2025 में एक कार दुर्घटना के बाद नीरज राजपूत को दयाल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से नीरज की स्थिति बिगड़ी और अंतत: उसकी जान चली गई। इस मामले में पिता की शिकायत पर कलेक्टर के निर्देशानुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नर्मदापुरम द्वारा एक जांच समिति गठित की गई थी, जिसकी रिपोर्ट 9 दिसंबर 2025 को पेश की गई।
जांच रिपोर्ट पर उठाए सवाल
पीडि़त परिवार ने जांच समिति की रिपोर्ट को विरोधाभासी बताते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिवार का कहना है कि जहां एक ओर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने माना था कि अत्यधिक रक्त बहने के कारण नीरज के गुर्दे फेल हो गए थे, वहीं जांच समिति की रिपोर्ट में ऑपरेशन और ड्रेसिंग की प्रक्रिया को सामान्य बताने की कोशिश की गई है। परिजनों का दावा है कि ऑपरेशन से पहले नीरज मल्टी ऑर्गन फेल्योर की स्थिति में नहीं था। रिपोर्ट में इस बात को स्पष्ट नहीं किया है कि अंगों ने काम करना कब और किन परिस्थितियों में बंद किया।
पिता धनपाल सिंह का आरोप है कि जांच समिति ने रिपोर्ट देने में 5 महीने का लंबा समय लिया, लेकिन फिर भी कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्पष्ट नहीं किया गया। मृतक के पिता धनपाल सिंह राजपूत ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि अस्पताल प्रबंधन और जांच रिपोर्ट की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है। उन्होंने सवाल किया कि अगर मरीज के महत्वपूर्ण अंगों ने काम करना बंद कर दिया था, तो उस समय परिजनों को सही विशेषज्ञ के पास ले जाने की सलाह क्यों नहीं दी गई? श्री राजपूत का कहना है कि हमें जिला स्तर की जांच से न्याय की उम्मीद नहीं दिख रही है, इसलिए हम जल्द ही हाई कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।









