इटारसी। कहते हैं कि सत्य अक्सर धुंध में छिपा होता है, और आज इटारसी की गलियों में यह दर्शन साक्षात उतर आया है। पिछले दो दिनों से सूरज की एक किरण को देखने के लिए तरसती आंखें अब इस ‘सफेद सन्नाटे’ की अभ्यस्त हो गई हैं। यह महज मौसम नहीं, बल्कि प्रकृति का एक ‘मौन उपवास’ है।
जितना पास, उतना ओझल
रात में कोहरे का आलम यह था कि इंसान को अपना हाथ तो दिखाई दे रहा था, पर अपना लक्ष्य (रास्ता) नहीं। दृश्यता 50 मीटर पर सिमट कर रह गई, मानो प्रकृति हमें सिखा रही हो कि भविष्य की चिंता छोड़ो, बस अगले कदम पर ध्यान दो।
सूरज का अज्ञातवास और अलाव की तपस्या
लगातार दूसरे दिन भी सूर्यदेव ने अपनी स्वर्णिम रश्मियों को बादलों के पीछे ही सुरक्षित रखा है। बाजारों में सन्नाटा है, लेकिन नुक्कड़ों पर जल रहे अलाव आज की सबसे बड़ी पंचायत बन गए हैं। वहां केवल शरीर नहीं तप रहे, बल्कि राजनीति से लेकर मौसम के मिजाज तक पर ‘गर्म’ चर्चाएं हो रही हैं। उत्तरी बर्फीली हवाओं ने जब हाड़ कंपाना शुरू किया, तो इन्सान को एहसास हुआ कि गर्म कपड़े सिर्फ धागों का मेल नहीं, बल्कि इस मौसम के विरुद्ध एकमात्र कवच हैं।
मौसम विभाग की भविष्यवाणी
आईएमडी के आंकड़ इसे शीतल दिन की श्रेणी में रख रहे हैं, लेकिन दार्शनिक दृष्टि से यह धैर्य की परीक्षा है। अगले 48 घंटे नर्मदापुरम जिले के लिए सिहरन के प्रतीक होंगे। तापमान 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास गोते लगाएगा। उत्तर से आने वाली हवाएं हिमालय का संदेश लेकर आ रही हैं, जो हमें याद दिलाती हैं कि परिवर्तन ही संसार का नियम है।









