इटारसी। द पार्क के पास बने रेल ओवर ब्रिज पर घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार को लेकर चल रहे विवाद ने अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। जहां एक ओर लंबे समय से अटके मरम्मत कार्य के लिए मशीनरी पहुंचने से स्थानीय व्यापारियों और आम जनता को जल्द राहत मिलने की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार के आरोपों ने रेलवे अधिकारियों पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा दिया है।
मरम्मत कार्य में तेजी की उम्मीद, राहत की सांस
पिछले कई दिनों से मरम्मत कार्य में हुई देरी के कारण इटारसी के व्यापारी और आम नागरिक गंभीर आवागमन समस्या झेल रहे थे। ब्रिज की मरममत के बंद या धीमे काम के चलते लोगों को भारी परेशानी हो रही थी। अब मरम्मत कार्य के लिए मशीनरी साइट पर पहुंचने के बाद काम में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे जल्द ही आमजन और व्यापारियों को इस समस्या से राहत मिल सकेगी।
राज्यसभा में उठा भ्रष्टाचार का मुद्दा
ओवरब्रिज के निर्माण में हुई कथित धांधली को लेकर आज राज्यसभा में जोरदार हंगामा हुआ। राज्यसभा सदस्य श्रीमती माया नारोलिया ने इस मुद्दे को पूरी मुखरता के साथ उठाया। उन्होंने ब्रिज के घटिया निर्माण और इसमें हुए भ्रष्टाचार को लेकर चिंता व्यक्त की। यह कार्रवाई एक दिन बाद आई है जब श्रीमती नारोलिया ने स्वयं रेल मंत्री से व्यक्तिगत रूप से शिकायत की थी। रेल मंत्री ने भी मामले की निष्पक्ष जांच करवाने और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था।
नेताओं ने डीआरएम से की मुलाकात
स्थानीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया है। आज नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मयूर जायसवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मंडल रेल प्रबंधक से मुलाकात की। उन्होंने के सामने ब्रिज में व्याप्त भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए दोषियों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की। डीआरएम ने भी कांग्रेस कमेटी को निष्पक्ष कार्यवाही का आश्वासन दिया है।
एक साल से लटकी जांच, अधिकारी मौन
यह दुखद है कि पिछले एक वर्ष से अधिक समय से ओवरब्रिज के घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार हो रही हैं। स्थानीय अखबारों ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए जनहित में इसे उजागर किया है। बावजूद इसके, अभी तक ब्रिज की इस दयनीय हालत के लिए किसी भी अधिकारी को दोषी नहीं ठहराया गया है। ना ही रेलवे प्रशासन ने अब तक किसी भी प्रकार की जांच के संकेत दिए हैं। लगातार हो रहे राजनीतिक हस्तक्षेप और राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा उठने के बाद, अब यह देखना बाकी है कि रेलवे प्रशासन कब तक अपनी चुप्पी तोड़ता है और इस गंभीर भ्रष्टाचार के मामले में कौन से अधिकारी नपते हैं।









