इटारसी। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के कोर जंगल की शांति अब एक नई हलचल में बदल गई है। जिन दो बाघों को वन विभाग ने बड़े लाड़-प्यार और ट्रेनिंग के बाद ‘आजाद’ किया था, उन्होंने अब अपना नया ठिकाना ढूंढना शुरू कर दिया है। ये दोनों बाघ एसटीआर की सीमाएं लांघकर अब नर्मदापुरम जिले के प्रादेशिक (टेरिटोरियल) वन क्षेत्र में जा पहुंचे हैं।
हर कदम पर सैटेलाइट की नजर
वन विभाग की तकनीकी टीमें इन बाघों के पीछे ‘छाया’ बनकर चल रही हैं। इसका श्रेय जाता है उनके गले में बंधी ‘रेडियो कॉलर आईडी’ को।
- 17 फरवरी को पहले बाघ ने सरहद पार कर इटारसी रेंज के जंगलों में अपनी दस्तक दी।
- दो दिन पहल दूसरा बाघ भी अपने साथी की राह पर चलते हुए कोर एरिया से बाहर निकल आया।
अनाथ से ‘शिकारी’ बनने का रोमांचक सफर
इन दोनों बाघों की दास्तां किसी संघर्ष गाथा से कम नहीं है। पिछले साल मार्च 2025 में रायसेन की भोजपुर रेंज में ये दोनों अपनी मां से बिछड़ गए थे। तब ये नन्हे शावक खुद शिकार करना भी नहीं जानते थे।
वन विभाग ने इन्हें ‘चूरना के मालनी बाड़े’ में पनाह दी। यहां करीब 8 महीनों तक इन्हें शिकार की बारीकियां सिखाई गईं, बिल्कुल वैसे ही जैसे एक मां अपने बच्चों को सिखाती है। जब ये पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गए, तो 2 जनवरी 2026 को इन्हें खुले जंगल में यह सोचकर छोड़ा गया कि ये अपना खुद का इलाका (टेरिटोरी) बनाएंगे। और अब, ये दोनों बाघ अपनी वही सल्तनत कायम करने के लिए बाहर निकल आए हैं।
‘डरें नहीं, बस खबर दें’ : वन विभाग का अलर्ट
एसटीआर की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा का कहना है कि बाघों का बाहर निकलना उनकी स्वाभाविक प्रवृत्ति है। वे नए इलाके की तलाश कर रहे हैं।
हाल ही में एक ग्रामीण का इन बाघों से आमना-सामना हुआ, लेकिन बाघ ने किसी तरह का हमला नहीं किया और पूरी तरह शांत रहा। इससे साबित होता है कि ये बाघ इंसानों से दूर रहना पसंद कर रहे हैं।
वन विभाग की अपील
- बाघ दिखने पर घबराएं नहीं और न ही शोर मचाकर उसे उकसाएं।
- मोबाइल से फोटो या वीडियो बनाने के चक्कर में बाघ के करीब न जाएं।
- तुरंत पास के फॉरेस्ट बीट गार्ड या रेंज ऑफिस को सूचना दें।
सख्त निगरानी
वर्तमान में एसटीआर और टेरिटोरियल टीम की संयुक्त टुकडिय़ां 24 घंटे इन बाघों की लोकेशन ट्रैक कर रही हैं। वन विभाग मुस्तैद है ताकि बाघ और इंसान, दोनों सुरक्षित रहें।









