इटारसी। तीन दिनों के लंबे इंतजार और बादलों की लुका-छिपी के बाद आज इटारसी के आंगन में कुदरत ने अपनी सुनहरी चादर बिछाई। आसमान साफ होते ही गुनगुनी धूप खिली, तो शहर का मिजाज भी कुछ शायराना हो गया। मशहूर शायर गुलजार के लफ्जों की तरह आज हर कोई बस यही कहना चाह रहा था…
जाड़ों की नर्म धूप और आंगन में लेट कर…
धूप की दस्तक, पर हवाओं में नश्तर
आज सुबह जब सूरज की पहली किरण ने इटारसी को छुआ, तो लोगों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई। पिछले तीन दिनों से छाई धुंध और बादलों के बाद खिली यह धूप इतनी भली थी कि लोग अपने घरों की छतों और आंगनों में वक्त गुजारते नजर आए। लेकिन, इस सुकून के बीच बर्फीली हवाओं ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराना नहीं छोड़ा। ठंड से बचने अनेक लोगों ने गर्म कपड़ों में लिपटे हुए भी अलाव का सहारा लिया।

मौसम का गणित, मद्धम रही पारे की चाल
धूप में चमक तो थी, पर तासीर में वो तपिश नहीं आ पाई जो ठंड को पूरी तरह मात दे सके। उत्तरी हवाओं के चलते पारे की चाल सुस्त बनी रही, जिसके कारण दिन भर हल्की कंपकंपी का अहसास होता रहा। धूप का अहसास सुहाना और सुकून देने वाला, हवाओं का मिजाज बर्फीली और मद्धम, शहर का हाल धूप सेंकते लोग, पर गर्म कपड़ों की ओट बरकरार रही।
फिजा में ठंडक, दिलों में गर्माहट
ठंडी हवाओं ने धूप के असर को थोड़ा फीका जरूर किया, लेकिन लोगों के उत्साह में कमी नहीं आई। चाय की चुस्कियों और गर्म पकोड़ों के दौर के साथ शहरवासियों ने इस सुनहरी दोपहर का जमकर लुत्फ उठाया। हालांकि, शाम ढलते ही बर्फीली हवाओं के तेवर फिर से सख्त होने की उम्मीद है, इसलिए फिलहाल गर्म कपड़ों से दूरी बनाना जल्दबाजी होगी।






