रीतेश राठौर, केसला। ग्रामीण अंचल के नागरिकों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने और उन्हें बैंकिंग धोखाधड़ी से बचाने के उद्देश्य से ग्राम सिलवानी में डीईए (जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता) फंड कार्यशाला का सफल आयोजन किया। भारतीय रिज़र्व बैंक के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने डिजिटल लेन-देन और जमाकर्ताओं के अधिकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
जमाकर्ताओं का हित सर्वोपरि
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं जनपद पंचायत केसला की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमन खातकर ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की सर्वोच्च प्राथमिकता जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने बताया कि डीईए फंड का मुख्य उद्देश्य पात्र जमाकर्ताओं को उनकी लावारिस जमा राशि वापस दिलाने में मदद करना और उन्हें बैंकिंग के प्रति जागरूक बनाना है।
विशेषज्ञों ने दिए वित्तीय सुरक्षा के मंत्र
मयंक मिश्रा ने ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती डिजिटल जरूरतों और सुरक्षा के बीच तालमेल बिठाने पर जोर दिया। बसंत श्रीवास्तव ने आरबीआई की एकीकृत लोकपाल योजना की जानकारी दी, जिससे ग्राहक अपनी बैंकिंग समस्याओं का समाधान घर बैठे पा सकते हैं। एस. पुरोहित ने बैंकों में वर्षों से पड़ी लावारिस राशि को वापस प्राप्त करने की आसान प्रक्रिया बताई।
कला और मनोरंजन से साक्षरता
कार्यशाला की खास बात यह रही कि यहां जानकारी देने के लिए केवल व्याख्यान का सहारा नहीं लिया गया, बल्कि पपेट शो, लोककला और खेलों के माध्यम से रोचक अंदाज में वित्तीय साक्षरता प्रदान की गई। ग्रामीण परिवेश के अनुरूप इस प्रस्तुति को उपस्थित लोगों ने काफी सराहा।
कार्यक्रम में सरपंच मूलचंद कास्दे, पंचायत सचिव अंबुलाल यादव और सहायक सचिव रमेश चंद्र उइके ने इस पहल को ग्रामीण विकास के लिए मील का पत्थर बताया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसी कार्यशालाओं से ग्रामीणों की मेहनत की कमाई सुरक्षित रहेगी और वे धोखाधड़ी का शिकार होने से बचेंगे।









