कांग्रेसी लीगल सेल के सचिव रमेश के साहू एडवोकेट ने उठाया मामला
इटारसी/भोपाल। किसानों और बटाईदारों के हितों के संरक्षण के लिए और उन्हें विवादों से बचाने के लिए एक कानून मध्य प्रदेश भूमि स्वामी एवं बटाईदार के हितों का संरक्षण अधिनियम 2016 बनाया गया है किंतु इसका पालन पंजीयन विभाग नहीं कर रहा है। उक्त आरोप मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी लीगल सेल के सचिव रमेश के साहू एडवोकेट ने लगाया है।
श्री साहू ने कहा कि उक्त नए कानून अनुसार किसान अपनी भूमि 5 वर्ष तक की अवधि के लिए कृषि कार्य हेतु दिए जाने हेतु स्वतंत्र है किंतु पंजीयन विभाग द्वारा उक्त कानून अनुसार सॉफ्टवेयर में अपडेशन नहीं किए जाने के कारण कृषको और बटाईदारो को उनके बीच होने वाले पट्टा विलेख का पंजीयन कराए जाने में कठिनाई उत्पन्न हो रही है। श्री साहू ने स्पष्ट करते हुए बताया कि पंजीयन विभाग में पूर्व कानून अनुसार सॉफ्टवेयर चल रहा है जिसमें 1 वर्ष से अधिक अवधि के लिए कृषि भूमि के पट्टे का पंजीयन कराने हेतु जब दस्तावेज प्रस्तुत किया जाता है तो उसे कृषि भूमि के स्थान पर परिवर्तित भूमि के रूप में ही सॉफ्टवेयर स्वीकार करता है जो कि उक्त कानून की मंशा के विपरीत है।।
उन्होंने कहा कि दिनांक 13 मार्च एवं 29 मई को उनके द्वारा कृषि भूमि के पट्टे ब्लेक के संबंध में महानिरीक्षक पंजीयन भोपाल और संपदा से लिखित रूप में निवेदन किया गया किंतु 3 माह से अधिक की अवधि समाप्त होने के पश्चात भी अब तक सॉफ्टवेयर का कानून अनुसार अपडेशन नहीं किया गया है जो तत्काल किया जाना आवश्यक है। श्री साहू ने कहा कि किसानों के हितों की बात करने वाली सरकार किसानों और बटाईदार ओं के हित में बने कानून का पालन स्वयं नहीं कर रही है।
कृषि भूमि पट्टा विलेख सॉफ्टवेयर कानून अनुसार अपडेट नहीं


Rohit Nage
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