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जीवन जीने की कला सिखाती है रामायण : प्रज्ञाजी

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इटारसी। संसार में प्रत्येक जन को जीवन जीने की कला का पूर्ण ज्ञान श्री रामायण जी प्राप्त होता है। उक्त उद्गार श्रीधाम वृंदावन की लोकप्रिय प्रवचनकर्ता श्रीमहंत साध्वी प्रज्ञा भारती ने श्री द्वारिकाधीश मंदिर प्रांगण में आयोजित श्री रामजन्म महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर व्यक्त किये।
श्री द्वारिकाधीश मंदिर में निरतंर 55 वे वर्ष में आयोजित धार्मिक आयोजन के द्वितीय दिवस में उपस्थित श्रोताओं को जीवन मरण का ज्ञान प्रदान करते हुए साध्वी प्रज्ञा जी ने कहा की यह दोनों ही जीवन के दो पहलू हैं परन्तु इनको कैसे सुन्दर बनाना है इसका पावन संदेश हमें दो ग्रन्थों से प्राप्त होता है। प्रथम ग्रन्थ है, श्रीराम चरित्र मानस जो हमें जीवन जीने की कला सिखाती है और दूसरा पावन ग्रन्थ है, श्रीमद् भागवत जो मृत्यु उपरांत हमारी आत्मा को परमात्मा में विलीन करने हेतु मोक्ष का सद्मार्ग बताता है। श्री रामकथा पर आधारित प्रवचन समारोह के प्रारंभ मे मप्र विधान सभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा, श्रीराम जन्म उत्सव समिति के अध्यक्ष सतीष सांवरिया, सचिव अशोक शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष जसवीर सिंह छाबड़ा, कोषाध्यक्ष संजय खंडेलाल के साथ संदीप मालवीय, ओमप्रकाश राठी, पूर्व पार्षद राजेश मालवीय एवं जयकिशोर चौधरी आदि ने श्रीराम चरित्र मानस की प्रराण पूजन कर साध्वी प्रज्ञा जी का स्वागत किया।

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