इटारसी। 11 जुलाई की रात 11 बजे, पुलिस की जुआरियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की व्यथा में आरोपी पक्ष ने पुलिस की कथा को फर्जी बता दिया है। शहर की पॉश कालोनी, द ग्रेन्ड ऐवेन्यू (एलकेजी) के फेज-2, सेक्टर-7 सी-1 एवं 2 से जुआरियों को पकडऩे की जो कथा की शुरुआत हुई, वह फर्जी थी। पुलिस ने उस दिन की कार्रवाई को छिपाने का असफल प्रयास भी किया था, और कोर्ट के किसी आदेश का हवाला देकर जुआरियों के नाम उजागर न करने की बात कही थी, जबकि उसके बाद से पुलिस ने जुआ के खिलाफ जितनी भी कार्रवाई की, सबमें नाम उजागर किये।
आरोप तो यह भी लग रहे हैं कि पुलिस ने नाम उजागर नहीं करने के 40 हजार रुपए लिये हैं। इसमें कितनी सच्चाई है, यह तो जांच का विषय है और शिकायत हुई है तो जांच भी अवश्य ही होगी। अब चर्चा यह चल पड़ी है कि कहीं होशंगाबाद जैसा पुलिस का चेहरा यहां भी सामने न आ जाये? लोग इसकी संभावना अधिक बता रहे हैं, क्योंकि शिकायतें भी पर्याप्त और पुख्ता सबूतों के साथ की गई हैं। पुलिस द्वारा नाम नहीं बताना भी संदेह को जन्म दे रहा है, यदि निष्पक्ष जांच होगी तो सच्चाई भी सामने आयेगी।
तीन पन्नों की शिकायत
शिकायत कर्ता निशांत जैन 47 वर्ष ने शिकायत की है कि 11 जुलाई की रात 11 बजे उसके निवास पर इटारसी पुलिस थाने में पदस्थ कर्मचारियों ने अवैधानिक कार्यवाही की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसका छोटा भाई मोनू उर्फ नीरज जैन एवं उसके अन्य दोस्त जो पारिवारिक सदस्य भी हैं, खाना खा रहे थे, पुलिस थाने के चार कर्मचारी सिविल ड्रेस में आये और बिना जूता-चप्पल उतारे घर में प्रवेश किया और मोबाइल से वीडियो रिकार्डिंग शुरु कर दी। पुलिस ने अभद्र भाषा का प्रयोग भी किया और धमकाया भी। जब चार कर्मचारियों ने प्रवेश किया तो थाने में पदस्थ हेमंत तिवारी, संजय रघुवंशी भी तुरंत पहुंचे और मेरे छोटे भाई मोनू उर्फ नीरज की जेब में रखे 17,500 रुपए निकाल लिये और उसके दोस्तों से कहा कि थाने चलो नहीं तो तुम पर कोई भी प्रकरण बनाकर हवालात में बंद करवा देंगे। ये लोग धमकाते हुए सभी को थाने ले गये और एक लाख रुपए का इंतजाम करने को कहा। नीरज के दोस्त गुल्लू जैन को 40 हजार रुपए देने को कहा तो पुलिस ने यह राशि स्वीकार कर ली। इसके बाद भी पुलिस ने मेरे भाई और उसके मित्रों पर कार्यवाही कर दी। संजय रघुवंशी ने गुल्लू जैन से 40 हजार रुपए लेते वक्त कहा था कि मेरे छोटे भाई से जो 17,500 निकाले हैं, वह वापस कर देंगे, जो अब तक वापस भी नहीं किये हैं।
सीसीटीवी कैमरे देखने की मांग
शिकायतकर्ता ने कहा कि एलकेजी कालोनी प्रवेश द्वार से मेरे घर आने तक की जानकारी कालोनी के सीसीटीवी कैमरे से सत्यापित की जा सकती है। सभी को जुआ एक्ट में गिरफ्तार करना बताया जा रहा है जबकि सत्य यह है कि पुलिस ने केवल ऋषि दुबे को लेकर गयी थी शेष सभी अपने वालों से पुलिस थाने पहुंचे थे, यह भी कैमरे की रिकार्डिंग से पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा पैसों के लेनदेन की बात गुल्लू जैन उर्फ अजीत जैन और पुलिस की बातचीत मोबाइल की काल रिकार्डिंग से पता चल सकती है।
आला अधिकारियों को शिकायत
शिकायतकर्ता ने एसपी को शिकायत के अलावा इसकी प्रति मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, पुलिस महानिरीक्षक को भी भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।







