इटारसी। शासकीय एमजीएम कॉलेज (Government MGM College) के भूगोल विभाग द्वारा आयोजित शैक्षणिक भौगोलिक भ्रमण अंतर्गत सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (Satpura Tiger Reserve)के पचमढ़ी नेशनल पार्क (Pachmarhi National Park) में स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने मध्य भारत के सबसे ऊंची चोटी, महादेव हिल्स की धूपगढ़ चोटी (1352 मी) की भूगर्भिक संरचना, भुआकृतिक बनावट तथा वनस्पतिक संरचना का भौगोलिक अध्ययन किया।
यहां छात्रों ने अवलोकन किया कि महादेव हिल्स की संरचना मुख्यत: गोंडवाना युग की बालुका पत्थर चट्टान से निर्मित है, जिसको देनवा एवं उसकी सहायक नदियों ने अपरदित करके विभिन्न भू-आकृतिक स्वरूपों को आकार दिया है। यहां पर जलप्रपात, छिप्रिका, क्लिफ, भ्रंश घाटी, गार्ज, कंदरा एवं झरने सहित अनेक भू-स्वरूपों को विकसित किया है। यहां पर बालुका पत्थर के साथ सिल और डाइक संरचना भी देखने को मिलती है। वनस्पतिक दृष्टिकोण से यह एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जिसमें विभिन्न उच्चावच पर भूगर्भिक संरचना से उत्पन्न विभिन्न मिट्टियों में एवं विशिष्ट जलवायु विशेषता के कारण मुख्यत: तीन प्रकार के वनस्पति संयोजन देखने को मिलते हैं।
निचली पीडमांट पर मिश्रित वनों का विस्तार, र्आद्र ढलानो पर र्आद्र वनस्पति का विस्तार तथा उच्च महादेव हिल्स पर सब ट्रॉपिकल वनस्पतियां पाई जाती हैं, जिसमें कुछ नदियां घाटियों में दुर्लभ फर्न एवं हिमालयन वनस्पति भी मिलते हैं।
क्या है पचमढ़ी में
विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ दिनेश कुमार ने विद्यार्थियों को बताया कि पचमढ़ी होशंगाबाद जिले में एक हिल स्टेशन है। यहां पर रजत प्रपात पचमढ़ी (Rajat Falls Pachmarhi) क्षेत्र का सर्वाधिक ऊंचा जलप्रपात है, जिसकी ऊंचाई 107 मीटर है और यह एक धारा के साथ होर्सटेल प्रकार का झरना है। पचमढ़ी के रीछगढ़ में लाल बलुआ पत्थर के स्तरीय जमाव की चट्टानें देखने को मिलती हंै, जो समुद्री वातावरण का एक अद्भुत उदाहरण है। स्नातकोत्तर द्वितीय वर्ष की छात्रा शिवानी महोबिया ने बताया कि इस भौगोलिक भ्रमण से हमें सतपुड़ा पर्वत के व्यावहारिक वास्तविक स्वरूप एवं भौगोलिक विशेषता को सूक्ष्म तरीके से अध्ययन करने का अवसर मिला, जिसमें हमें कई प्रकार के स्थल रूपों को देखा और समझा।
इस भ्रमण में पचमढ़ी पर्यटन क्षेत्र के रजत प्रपात, अप्सरा विहार, पांचाली कुंड, पैरासेलिंग, बायसन लॉज म्यूजियम, पांडव गुफा, पंचमढ़ी झील, रीछगढ़, हांडी खोह, राजेंद्र गिरी आदि स्थलों का भ्रमण कराया। यह भौगोलिक भ्रमण महाविद्यालय के प्राचार्य एवं भूगोलविद डॉक्टर पी के पगारे के निर्देशन में संपन्न हुआ। इस भ्रमण में भूगोल विभाग के आरती धुर्वे, अजीत धुर्वे, सत्यम कुमार, मनोज कुमार, शिवानी महोबिया, सोनम चौरे, उर्मिला सेलुकर, अनामिका चौरे, कविता अहिरवार, शिखा चौरे, सावित्री धुर्वे, मनीषा वर्मा, सुनीता ब्रह्मवंशी, राहुल मेहरा, सुरभि सिंह, दिनेश प्रजापति, राकेश कुमार, अनिल, रामभरोस, ज्योति प्रजापति, मनीष चौरे, परमानंद चौधरी शामिल रहे।








