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पर्यावरण संरक्षण के लिए बढ़ते कदम, कृत्रिम कुंड में होगा गणेश विसर्जन

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इटारसी। दस दिवसीय गणेश उत्सव के समापन के अवसर पर, अनंत चतुर्दशी पर गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए नगर पालिका परिषद इटारसी ने हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी महत्वपूर्ण और पर्यावरण-हितैषी पहल की है। पिछले वर्षों की परंपराओं को अपनाते हुए इस वर्ष भी नगर पालिका ने मेहरागांव नदी के किनारे एक कृत्रिम विसर्जन कुंड का निर्माण किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य नदी के प्राकृतिक जल को प्रदूषण से बचाना है।

नगर पालिका के इस नए कदम के तहत, 8 फीट गहरे कृत्रिम कुंड का निर्माण किया गया है, जो न केवल छोटी, बल्कि बड़ी प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए भी पर्याप्त है। बड़ी प्रतिमाओं को सहजता से कुंड तक लाने और विसर्जित करने के लिए नगर पालिका ने क्रेन की व्यवस्था भी की है। यह सुविधा यह सुनिश्चित करेगी कि भक्तों को बिना किसी कठिनाई के विसर्जन प्रक्रिया पूरी करने में मदद मिले।

सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम

विसर्जन स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए विस्तृत योजना तैयार की गई है। नगर पालिका, पुलिस और राजस्व विभाग के कर्मचारियों की तीन शिफ्टों में ड्यूटी लगाई जाएगी, जिनमें प्रत्येक शिफ्ट 8-8 घंटे की होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि विसर्जन स्थल पर निरंतर निगरानी और सहयोग उपलब्ध रहे। इसके साथ ही, नगर पालिका की ओर से भक्तों की सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। विसर्जन स्थल पर टेंट, माइक और लाइट की उचित व्यवस्था की गई है। पूजा-अर्चना के बाद बैठने के लिए कुर्सियों का भी इंतजाम किया जाएगा, ताकि भक्तों को किसी तरह की असुविधा न हो।

केवल प्रशिक्षित तैराक कुंड में कर सकेंगे प्रवेश

नगर पालिका की सीएमओ श्रीमती ऋतु मेहरा ने बताया कि सुरक्षा के लिए विसर्जन स्थल पर लाइफ जैकेट और ट्यूब आदि मौजूद रहेंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विसर्जन कुंड में केवल नगर पालिका के कुशल तैराकों को ही जाने की अनुमति होगी। ये तैराक ही प्रतिमाओं को लेकर विसर्जित करेंगे। आमजन को विसर्जन कुंड में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। यह निर्णय इसलिए लिया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके और विसर्जन स्थल पर अनुशासन बना रहे। भक्तों से अनुरोध किया गया है कि वे अपनी प्रतिमाएं पूजा-अर्चना के बाद इन कर्मचारियों को सौंप दें।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

यह कृत्रिम विसर्जन कुंड की पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है। पारंपरिक रूप से नदी में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन से नदी का जल प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी), रासायनिक रंगों और अन्य सजावटी सामग्रियों से प्रदूषित होता है, जिससे जलीय जीवों को खतरा होता है और पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचता है। कृत्रिम कुंड में विसर्जन करके, इन हानिकारक सामग्रियों को नदी में जाने से रोका जा सकेगा।

शनिवार को ही विसर्जन की उम्मीद

आमतौर पर इटारसी में मूर्तियों का विसर्जन दो दिनों तक चलता है, लेकिन इस वर्ष रविवार को ग्रहण होने के कारण यह उम्मीद की जा रही है कि अधिकांश गणेशोत्सव समितियां शनिवार, अनंत चतुर्दशी को ही अपनी गणेश मूर्तियां विसर्जित कर देंगी। यदि ऐसा होता है तो इस पहल के माध्यम से, गणेशोत्सव की श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण का एक सुंदर संगम देखने को मिलेगा।

Rohit Nage

Rohit Nage has 30 years' experience in the field of journalism. He has vast experience of writing articles, news story, sports news, political news.

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