कन्हैयालाल वर्मा, नर्मदापुरम। शहर में आयोजित श्रीरामलीला महोत्सव का समापन विजयादशमी के पावन पर्व पर हुआ, जहां दशहरा मैदान में भगवान श्रीराम द्वारा रावण वध की मनमोहक लीला का मंचन किया गया। इस ऐतिहासिक क्षण के बाद रावण के विशाल 40 फीट ऊंचे पुतले का दहन किया गया, जिसने बुराई पर अच्छाई की शाश्वत विजय का संदेश दिया।
लीला मंचन : धर्म, शौर्य और विजय
लीला में दर्शाया गया कि श्रीराम-रावण युद्ध में जब रावण के बलशाली भाई कुम्भकरण और पुत्र मेघनाद वीरगति को प्राप्त हुए, तो रावण स्वयं युद्ध के लिए मैदान में उतरा। श्रीराम और रावण के मध्य आग्नेयास्त्रों से भयंकर युद्ध शुरू हुआ। इस दौरान, प्रभु श्रीराम को पैदल और रावण को रथ पर युद्ध करते देख विभीषण अधीर हो उठे। तब विभीषण ने प्रभु श्रीराम को युद्ध के मैदान में धीरज, शौर्य, बल और धर्म के उपदेश दिए। जब रावण के सारे प्रयास विफल हो गए, तो उसने एक अपावन यज्ञ करने की कोशिश की, जिसे हनुमान और सुग्रीव आदि वानर सेना ने असफल कर दिया। अंतत:, प्रभु श्रीराम ने अपने सारंग धनुष पर इकतीस बाणों का एक साथ संधान करके अहंकारी रावण का वध कर दिया। इस दृश्य को देख उपस्थित जनसमूह भाव-विभोर हो उठा।

रावण दहन के इस उत्सव में डॉ. सीतासरन शर्मा, मप्र विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष एवं विधायक, सुश्री सोनिया मीना, कलेक्टर, नर्मदापुरम, साईं कृष्ण एस थोटा, पुलिस अधीक्षक, पं. गिरिजाशंकर शर्मा, रामलीला समिति के अध्यक्ष, पं. भवानी शंकर शर्मा, श्रीमती नीतू यादव, नपा अध्यक्ष, अरुण शर्मा, रेडक्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन, वैभव शर्मा, मेला प्रबंधक, योगेश्वर तिवारी, रामलीला समिति सचिव, प्रशांत दुबे, संयोजक, अधिवक्ता अजय प्रकाश श्रीवास्तव एवं द्वारका प्रसाद वर्मा मौजूद रहे। रामलीला समिति के सचिव योगेश्वर तिवारी और संयोजक प्रशांत दुबे ने सभी अतिथियों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया।









