इटारसी। जिले को हरित क्रांति की सौगात देने वाले तवा डेम का पेट अभी आधा ही भरा है। यदि पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो इस वर्ष रबी फसल के लिए पानी देना भी मुश्किल हो जाएगा।
अब तक हुई बारिश से तवा डेम में महज 44 फीसदी ही पानी भरा जा सका है। उस पर बैतूल में जलस्तर नीचे जाने से वहां जलसंकट की स्थिति बन गई है। बैतूल क्षेत्र के अधिकारी तवा से पानी परिवहन करके आमजन की प्यास बुझाने का विचार कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो फिर गेहूं के लिए पानी देना संभव नहीं होगा। उच्च पदस्थ सूत्रों ने भी इस बात की संभावना पर सहमति जतायी है। हालांकि यह सब शासन के निर्देशों पर निर्भर करेगा। हालांकि पिछलेे दो दिन से मानसून की पुन: सक्रियता ने उम्मीद जगा दी है, मांग के अनुरूप बारिश होगी इसकी संभावना कम ही है। इतना तो तय है कि यदि बैतूल के लिए पानी का परिवहन हुआ तो होशंगाबाद और हरदा जिले में इस वर्ष केवल वही लोग गेहूं की फसल ले सकेंगे जिनके पास सिंचाई के लिए अपने जलस्रोत या संसाधन हैं। तवा बांध का निर्धारित जल स्तर 1166 फुट तक पानी चाहिए तभी फसल के लिए पर्याप्त पानी दिया जा सकता है, लेकिन वर्तमान में केवल 1145.10 फुट ही पानी भरा है। यानी 21 फुट कम। जल संसाधन विभाग इसे महज 44 फीसदी भराव मानता है जबकि इस अवधि तक बांध में 80 फीसदी पानी आ जाना चाहिए था। तवा बेसिन में अब तक वर्षा लगभग 434 मिमी वर्षा हुई है जबकि पिछले वर्ष अब तक करीब 12 सौ मिमी वर्षा हो चुकी थी। तवा की औसत वर्षा 1500 मिमी है।
इनका कहना है…
अभी बांध में पानी आ रहा है, बारिश से भी कुछ उम्मीद जगह है। लेकिन, जैसी बारिश हो रही है, लगता नहीं है कि बांध में पर्याप्त पानी आ सकेगा। पिछले वर्ष की अपेक्षा 50 फीसदी भी बारिश नहीं हुई है। इस बार रबी फसल को एक भी पानी देना मुश्किल होगा। हमने किसानों को कम पानी पानी फसल लेने का सुझाव दिया है।
आईडी कुमरे, ईई जल संसाधन







