इटारसी। विकास गणेश उत्सव समिति 6 वीं लाइन में चतुर्थ वर्ष में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि समाजसेवी प्रमोद पगारे थे। अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश के साहू ने की। विशेष अतिथि भाजपा के जिला उपाध्यक्ष संदेश पुरोहित, भाजपा ग्रामीण मंडल अध्यक्ष आशुतोषशरण तिवारी वरिष्ठ व्यापारी महेश अग्रवाल उपस्थित थे। आमंत्रित कवि साजन ग्वालयरी हास्य व्यंग्य, ग्वालियर, राहुल शर्मा वीर रस उज्जैन, सुमित्रा सरल नामली रतलाम गीतकार, सफर जोनपुरी हास्य व्यंग्य जोनपुर, संतोष सागर विदिशा हास्य व्यंग्य, सुनील भिलाला गीतकार होशंगाबाद एवं अतंराष्ट्रीय कवि राजेन्द्र मालवीय का अतिथियों ने स्मृति चिन्ह, शाल, श्रीफल से सम्मान किया।
प्रथम चरण का संचालन गोविन्द श्रीवास्तव ने एवं कवि सम्मेलन का संचालन संतोष सागर विदिशा ने किया। समिति की ओर से कवि सम्मेलन को सफल बनाने गौरव साहू, बाबू अग्रवाल, हिमांशु अग्रवाल, हरिओम सोनी,पुनीत सोनी, गोलू सोनी, बाबू चौधरी,अर्जुन भोला, मयूर जैसवाल आदि ने कवियों का सम्मान किया एवं पूर्ण सहयोग दिया। गणेश एवं सरस्वती वंदना से कवि सम्मेलन प्रारंभ हुआ। नोट बंदी को लेकर अंतराष्ट्रीय कवि राजेन्द्र मालवीय ने कहा कि नोटबंदी के दो दिन पहले मुंबई जा रहे थे पैसे मागंने पर पत्नी ने कहा पैसे नहीं हैं। जब लौट कर आया तब पत्नी ने कहा 1,00,000/- बर्बाद हो गये तब राजेन्द्र मालवीय ने व्यंग्य करते हुये कहा कि कल रात में घर में था नहीं फिर पैसा आया कहा से। तब पत्नी ने उन्हें उत्तर दिया जब आप घर से बाहर जाते है तभी तो घर में पैसे आते हैं। मालवीय का इशारा महिलाओं द्वारा जमा की गई पूंजी पर नोटबंदी के असर को लेकर था।
सुनील भिलाला ने कहा कि कट रहे हैं झाड़ पेड़ मिट रही है छाया, इतना सबकुछ हो जाने पर इंसा कुछ समझ नहीं पाया। हास्य व्यंग्य के कवि सफर जोनपुरी ने कहा कि सफर के साथ सफर कर लो सलीका सीख जाओगे यकीनन जिंदगी जीने का तरीका सीख जाओगे। नामली रतलाम से आई गीतकार सुमित्रा सरल ने कहा कि आंखों से मोती लुटा कर के देखो और मोहब्बत से नजरे मिलाकर देखो। वीर रस के कवि उज्जैन से आये राहुल शर्मा ने कहा कि बिना दंड उदंडो की दानवता मंद नही होगी केवल भाषण बाजी से गौ हत्या बंद नही होगी। ग्वालियर से आये साजन ग्वालयरी ने प्रदेश की बेहाल सड़को पर व्यंग्य कसा। देर रात तक कवि सम्मेलन सुनने के लिये पुरूष एवं महिला श्रोता भारी संख्या में मौजूद रहे।
देर रात तक कवियों ने श्रोताओं को बांधे रखा
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