अनाहत का प्रवेशांक केन्द्रित होगा गीतकार चांद के गीतों पर

इटारसी। मानसरोवर साहित्य समिति शहर के गीतकार चांदमल चांद के गीतों पर आधारित अनाहत का प्रकाशन करेगी। यह संकल्प संस्था के विनोद कुशवाह ने विपिन परंपरा के गीतकार नत्थूसिंह चौहान की पुण्यतिथि पर लिया था।
हृदय के टुकड़े हैं इनको चूमिये, गीत के मुखड़े हैं इनको चूमिये, जीत का उल्हास है इनमें किसी के हार के दुखड़े हैं इनको चूमिये।
उपरोक्त पंक्तियां श्री चांद के कविता संग्रह कविता के दो बोल सुना दो की पांडुलिपि के प्रथम पृष्ठ पर लिखी हुई हैं। उन्होंने इस संग्रह के लिए आवरण तक तैयार कर रखा था जो कवर पेज पर दिया है। श्री कुशवाहा अफ़सोस जताते हुए कहते हैं कि उनके जीवित रहते हुए उनका संग्रह प्रकाशित नहीं हो पाया। 14 जून को उनकी पुण्यतिथि पर मैंने उन्हें याद करते हुए इस विषय पर विचार किया और 30 अगस्त को विपिन परंपरा के ही गीतकार नत्थू सिंह चौहान की पुण्य तिथि पर चांद साहब के कुछ चर्चित गीतों के प्रकाशन का संकल्प लिया। मानसरोवर साहित्य समिति द्वारा प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर के माध्यम से भी ये संभव था लेकिन चूंकि ये संकल्प स्वयं मेरा था इसलिये मैंने साहित्यिक संस्था संकल्प के माध्यम से एक नई पत्रिका अनाहत की शुरुआत के साथ इस संकल्प को पूर्ण करने का निश्चय किया है। उन्होंने बताया कि इसका प्रवेशांक चांदमल चांद के गीतों पर केन्द्रित रहेगा।

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