कृषि उपज मंडी समिति की बैठक
इटारसी। सांसद और विधायक तो संसद और विधानसभाओं में अपना वेतन बढ़वा लेते हैं, जनपद सदस्य को भी अच्छा भत्ता मिल जाता है, पार्षद का वेतन भी हमसे बहुत अच्छा है, हम कब तक महज पांच सौ रुपए भत्ते में अपना काम चलाएं? इतने पैसे तो हम गांव ये यहां आना-जाना करते हैं, उसमें भी कम पड़ जाते हैं। हमारा भी भत्ता बढऩा चाहिए अन्यथा हम आगे की बैठकों में नहीं आएंगे।
यह नाराजी भरे शब्द थे, कृषि उपज मंडी समिति में ग्राम सेमरीखुर्द से सदस्य राम प्रकाश वर्मा उर्फ राजू टाइगर के। उनकी इस मांग का समर्थन मंडी के अध्यक्ष सदस्यों ने भी किया। सभी सदस्यों ने कहा कि उनका भत्ता भी बढऩा चाहिए। हम कई गांवों को मिलाकर बने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, हमारी स्थिति तो पार्षद से भी बदतर है। हमारी मंडी सरकार को पैसे कमाकर देती है, जबकि अन्य विभाग सरकार से पैसा खर्च कराते हैं, बावजूद इसके हमारी तरफ सरकार का ध्यान ही नहीं है।
जा चुका है प्रस्ताव
राजू टाइगर की इस नाराजी का जवाब कृषि मंडी के अध्यक्ष विक्रम तोमर ने दिया। उन्होंने बताया कि हम एक मर्तबा पहले भी यह प्रस्ताव मंडी बोर्ड को प्रेषित कर चुके हैं, आज पुन: एक प्रस्ताव भेजेंगे। उन्होंने कहा कि आपकी मांग का मैं भी समर्थन करता हूं, लेकिन केवल हमारी मांग से काम नहीं चलेगा। प्रदेश में ऐसी 348 मंडियां हैं, केवल हमारी मांग से सुनवाई नहीं होगी। राजू टाइगर ने कहा कि हमारे प्रस्तावों को वहां शायद कचरे में फैक देते हैं, हमें एक प्रतिनिधिमंडल लेकर जाना होगा, हम भोपाल जाकर ही वरिष्ठ अधिकारियों और कृषि मंत्री के समक्ष अपनी मांग रखें, ताकि हमारी मांग पर विचार किया जा सके।
बलराम की मूर्ति का मामला
कृषि उपज मंडी परिसर में भगवान बलराम की मूर्ति लगाने का प्रस्ताव एक बार मंडी बोर्ड को मंडी समिति भेज चुकी हैं, इस बैठक में मंडी सदस्य चंदाबाई तोमर ने उस प्रस्ताव की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए सुझाव दिया कि इसके लिए मंडी बोर्ड को रिमाइंडर भेजा जाना चाहिए। इस पर अध्यक्ष श्री तोमर ने कहा कि पहले प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन क्या प्रक्रिया हुई, बात कितनी आगे बढ़ी इसका पता लगाया जाएगा। मंडी के अन्य सदस्यों ने भी इस प्रस्ताव के समर्थन में अपनी सहमति जताते हुए कहा कि मंडी परिसर में भगवान बलराम की मूर्ति लगायी जानी चाहिए। सचिव सुनील गौर ने कहा कि पत्राचार करेंगे।
अब तो सड़क भी नहीं बनती
श्रीमती चंदा बाई तोमर ने कहा कि अब तो मंडी बोर्ड सड़क निर्माण तक नहीं कराता है, कई वर्ष पूर्व तत्कालीन मंडी अध्यक्ष ममता पटेल के कार्यकाल में कुछ गांवों के लिए सड़कों का निर्माण हुआ था, इसके बाद से मंडी बोर्ड ने कभी सड़कें नहीं बनवायी जबकि गांवों से किसान मंडी में अनाज लेकर आता है, जर्जर रोड होने से दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं। हमारी कृषि मंडी को उन्हीं किसानों से आय होती है जो मंडी बोर्ड तक पहुंचती है, ऐसे में बोर्ड को किसानों की सुविधा के लिए रोड का निर्माण कराना चाहिए। मंडी अध्यक्ष विक्रम तोमर ने बताया कि नियमों में बदलाव हुए हैं, अब अध्यक्ष को यह अधिकार नहीं है, कि वह सड़क बनवा सके।
बैठक में सदस्य पन्नालाल उईके, सतीश मेहतो, रामप्रकाश वर्मा उर्फ राजू टाइगर, नर्बदा प्रसाद यादव कल्लू पहलवान, कीर्ति वर्मा, जमुना बाई बरखने, चंदा तोमर, सीताबाई सहित अन्य सदस्य मौजूद थे।









