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श्रीमद्भागवत समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाला कल्पवृक्ष : आचार्य

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होशंगाबाद। यहां के ईशान परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में प्रथम दिवस की कथा सुनाते हुए आचार्य पुष्कर परसाई ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य की सभी इच्छाओं को पूरा करती है। यह कल्पवृक्ष के समान है। आवश्यकता है कि मनुष्य इसे निर्मल भाव से सुनें और सत्य धर्म के मार्ग का पालन करें। कथा व्यास ने कहा कि भागवत कथा ही साक्षात कृष्ण है और जो कृष्ण है, वही साक्षात भागवत है। भागवत कथा भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। भागवत की महिमा सुनाते हुए कहा कि एक बार नारद जी ने चारों धाम की यात्रा की, लेकिन उनके मन को शांति नहीं हुई। नारद जी वृंदावन धाम की ओर जा रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि एक सुंदर युवती की गोद में दो बुजुर्ग लेटे हुए थे, जो अचेत थे। युवती बोली महाराज मेरा नाम भक्ति है। यह दोनों मेरे पुत्र है, जिनके नाम ज्ञान और वैराग्य है। यह वृंदावन में दर्शन करने जा रहे थे। लेकिन बृज में प्रवेश करते ही यह दोनों अचेत हो गए। बूढ़े हो गए। आप इन्हें जगा दीजिए। इसके बाद देवर्षि नारद जी ने चारों वेद, छहों शास्त्र और 18 पुराण व गीता पाठ भी सुना दिया। लेकिन वह नहीं जागे। नारद ने यह समस्या मुनियों के समक्ष रखी। ज्ञान-वैराग्य को जगाने का उपाय पूछा। मुनियों के बताने पर नारद जी ने हरिद्वार धाम में आनंद नामक तट पर भागवत कथा का आयोजन किया। मुनि कथा व्यास और नारद जी मुख्य परीक्षित बने। इससे ज्ञान और वैराग्य प्रथम दिवस की ही कथा सुनकर जाग गए।
इसके पूर्व आचार्य श्री ने कथा में प्रवेश कराते हुए प्रथम स्कंध के प्रथम श्लोक सच्चिदानंद रूपाय विश्वोत्पयादि हेतवे, तापत्रय विनाशाय श्री कृष्ण वयं नम: की व्याख्या करते हुए भक्तों को सुखदेव जी के जन्म की कथा का वृतांत सुनाया। आचार्य श्री ने कहा कि सुखदेव जी माता के गर्भ से जन्म लेते ही वन में चले गए। ऐसे सर्वभूत श्री सुखदेव जी जिन्हें ये भी नहीं पता की स्त्री और पुरुष में क्या भेद है। जिनके पिता श्री वेद व्यास जी उन्हें मिलने के लिए जंगल गए और पुत्र-पुत्र कहते हुए थक गए तब तरु यानि वृक्षों ने कहा की कौन किसका पुत्र और कौन किसका पिता? वेद व्यास जी आप जिनको अपना पुत्र कह रहे हैं वो तो कभी आपका पिता था। ऐसे शब्दों को श्रवण करने से वेद व्यास जी को सत्य का ज्ञान हो गया और वो सुखदेव जी को बिना साथ लिए ही वापस चले आए। आचार्य श्री ने श्री मद्भागवत कथा का परिचय देते हुए कहा कि श्री मद्भागवत कथा मानव जीवन का आधार है। श्री मद्भागवत ह्रदय के संशयों को दूर करती है। इस दौरान हरिनाम संकीर्तन कर ठाकुर जी का गुणगान किया। कार्यक्रम के मुख्य यजमान डॉक्टर मलय -डॉ रोमराय जयसवाल जी ने श्रीमद्भागवत का पूजन कर आशीर्वाद लिया तद्पश्चात ठाकुर जी की आरती के साथ प्रथम दिवस की कथा को विश्राम दिया गया

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