इटारसी। शासन की ओर से शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीट पर गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले एवं अनुसूचित जाति के बच्चों को प्रवेश दिया जाता है, जिसके प्रतिफल स्वरूप शासन द्वारा स्कूल को सत्र समाप्ति पर इन बच्चों की फीस का भुगतान किया जाता है। परंतु विडंबना यहां यह है कि स्कूलों को सत्र 2016-17, 2017-18, 2018-19 एवं 2019-20 का अभी तक फीस का भुगतान नहीं हुआ है। इस संबंध में आज प्रायवेट स्कूल एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष शिव भारद्वाज एवं नगराध्यक्ष जाफर सिद्दीकी ने विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा को एक ज्ञापन सौंपा जिसमें मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस कोरोना महामारी के चलते जिन अशासकीय स्कूलों की सत्र 2016-17, 2017-18 की आरटीई फीस शेष है, उनका भुगतान अविलंब किया जाये, साथ ही समस्त अशासकीय स्कूलों को सत्र 2018-19 एवं 2019-20 का पूर्ण भुगतान बिना किसी औपचारिकता के मानवीय आधार पर अविलंब किया जाये।
उन्होंने बताया कि कई निजी शालायें आर्थिक संकट में हैं और कुछ बंद होने की कगार पर हैं। वर्तमान में कोरोना महामारी के चलते सभी स्कूलों में विगत सत्र 2019-20 की फीस कई अभिभावकों से प्राप्त नहीं हुई है, न ही नई प्रवेश प्रक्रिया हो पायी है जिसके कारण आर्थिक संकट है। शासन ने विगत 4 सत्र की फीस अभी तक नहीं दी है और न ही स्कूल खुलने की अभी कोई निश्चितता है। लेकिन सत्र 2020-21 के लिये आरटीई प्रवेश की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। स्कूलों से उनकी 25 प्रतिशत आरक्षित सीट एवं वार्ड की सीमाओं की जानकारी ली गई है। अब ऐसी स्थिति में यदि कोई स्कूल किसी भी नियम में कोई भी चूक करता है तो विभाग के बड़े अधिकारी से लेकर अदना अधिकारी तक सीधी एक बात करते हैं कि क्यों न आप मान्यता रद्द की जाये। समस्त स्कूलों की ओर से प्राईवेट स्कूल एसोसिएशन ने मांग की है कि विगत 4 वर्षों का आरटीई की राशि का भुगतान तुरंत किया जाये जिससे अशासकीय स्कूलों को कुछ आर्थिक सहयोग मिले।
पीएसए ने की आरटीई फीस भुगतान की मांग


Rohit Nage
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