होशंगाबाद। शासकीय गृहविज्ञान महाविद्यालय (Government Home Science College) में स्वामी विवेकानंद केरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ (Swami Vivekananda Career Guidance Cell) के तत्वाधान में नैतिक शिक्षा और उसका महत्व विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसका उद्घाटन करते हुए प्राचार्य डॉ. कामिनी जैन (Principal Dr. Kamini Jain) ने भगवान श्री राम के जीवन से प्रेरणा लेने और उनके व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया। उन्होने बताया कि व्यक्ति के संपूर्ण जीवन में नैतिकता एक स्थाई आधार होती है और यदि इसमें कमी हो तो व्यक्ति का जीवन पूर्ण नहीं माना जा सकता। डॉ यशवंत निंगवाल ने हितोपदेष के श्लोक को पढ़कर उसकी सरल भाषा में व्याख्या की एवं बताया कि विद्वान व्यक्ति ना सिर्फ अपने देश में बल्कि दुनिया में सर्वत्र सम्मान का पात्र होता है। मुख्य वक्ता डॉ. रागिनी दुबे ने अपने उद्बोधन में बताया कि नैतिकता क्यों आवश्यक है, और जीवन में प्रत्येक पड़ाव पर वह कितनी महत्वपूर्ण है। संस्कारों के निर्धारण एवं उनकी निष्पत्ति और व्यक्ति के सामाजिक व्यवहार जगत में नैतिकता परम आवश्यक है। लेकिन गिरते सामाजिक और नैतिक मूल्यों के इस युग में व्यक्ति की अनैतिकता उसके जीवन पर छाई हुई है। व्यक्ति आर्थिक समृद्धि को ही नैतिक मापदंड मानने लगा है और यदि वह इसी तरह से नैतिक शिक्षा और मूल्यों से विमुख होता गया तो एक दिन भारतीय संस्कृति और इस देश का सामाजिक एवं सांस्कृतिक अवमूल्यन हो जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्माण उसके जन्म से ही मां, परिवार एवं उसके आसपास के वातावरण से हो जाता है। बच्चा जो देखता है उसी को अपने व्यवहार में लाता है तथा उसी को अनुकरण करके उसी तरह का सामाजिक तादात्मिकरण करने लगता है। समिति संयोजक डाॅ रश्मि श्रीवास्तव ने सभी का आभार व्यक्त किया।
नैतिक शिक्षा और उसके महत्व पर ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन

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