इटारसी। साल 2026 का आगाज हो चुका है और इस नए साल का जश्न मनाने के लिए केवल धरतीवासी ही नहीं, बल्कि ब्रह्मांड के दो सबसे बड़े सितारे, सूर्य और चंद्रमा भी पृथ्वी के बेहद करीब आ गए हैं। इस खगोलीय जुगलबंदी ने नए साल के पहले वीकेंड को बेहद खास और रोमांचक बना दिया है।
नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने इस अद्भुत घटना की जानकारी देते हुए बताया कि आज पृथ्वी सूरज के सबसे नजदीकी बिंदु पर होगी, तो वहीं चंद्रमा भी पृथ्वी के काफी करीब रहकर सुपरमून जैसा नजारा पेश करेगा।
सूरज के गले लगेगी पृथ्वी
सारिका ने बताया कि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा अंडाकार पथ में करती है। शनिवार 3 जनवरी रात्रि 10 बजकर 45 मिनट पर पृथ्वी सूर्य के सबसे निकटतम बिंदु पर पहुंच जाएगी। इस स्थिति को खगोल विज्ञान में पेरिहेलियन कहा जाता है। शनिवार को यह दूरी घटकर मात्र 14 करोड़ 70 लाख 99 हजार 894 किमी रह जाएगी। इसके विपरीत, जुलाई में पृथ्वी सूर्य से सबसे दूर 15 करोड़ 20 लाख किमी से अधिक होती है।
क्या आज वुल्फ सुपरमून है?
सोशल मीडिया पर आज के चांद को वुल्फ सुपरमून कहा जा रहा है, लेकिन सारिका ने इसकी वैज्ञानिक स्थिति स्पष्ट की। चंद्रमा 1 जनवरी को पृथ्वी के सबसे करीब था और अब दूर जाना शुरू हो गया है। इसलिए पूर्णिमा पर यह लगभग सुपरमून जैसा बड़ा और चमकदार दिखेगा। शनिवार की रात चंद्रमा मिथुन राशि में रहते हुए पृथ्वी से करीब 3 लाख 62 हजार किमी की दूरी पर रहेगा। यदि आप साल का सबसे बड़ा और वास्तविक सुपरमून देखना चाहते हैं, तो आपको 24 दिसंबर 2026 का इंतजार करना होगा।
स्काई वॉचिंग के साथ करें 2026 का स्वागत
सारिका घारू ने अपील की है कि नए साल के प्रथम सप्ताह में जब प्रकृति ने हमें ऐसा उपहार दिया है, तो इस वीकेंड पर छतों और खुले मैदानों से आसमान की इस खूबसूरती को निहारें। पृथ्वी के सबसे पास स्थित सन और मून के साथ 2026 के आगमन की खुशियां मनाना एक यादगार अनुभव होगा।








