इटारसी। मध्य प्रदेश का महत्वपूर्ण रेल जंक्शन, इटारसी रेलवे स्टेशन, इन दिनों सुविधाओं से ज्यादा अव्यवस्थाओं के लिए चर्चा में है। स्टेशन की लिफ्ट और एस्केलेटर माह में ज्यादातर वक्त शोपीस बने रहते हैं, जिससे बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों की परेशानी चरम पर है। यात्रियों को भारी सामान के साथ सीढिय़ां चढऩे को मजबूर होना पड़ रहा है, और कई बार जवानों को सहारा देना पड़ रहा है।
निर्माण सामग्री बनी जोखिम, रेट घटने पर भी लूट जारी

स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्य की लापरवाही स्पष्ट दिखाई देती है। नए फुट ओवरब्रिज का निर्माण पूरा हुए करीब दो साल हो गए, लेकिन इसके आसपास पड़ी निर्माण सामग्री को हटाने की सुध किसी अधिकारी को नहीं है, जिससे यात्रियों के लिए जोखिम पैदा हो गया है। खानपान स्टॉल्स पर भी यात्रियों को चूना लगाया जा रहा है। रेल नीर की बोतल, जिसके दाम जीएसटी घटने के बाद लगभग 14 रुपए हो गए हैं, अब भी बड़े अक्षरों में लिखे 15 रुपए में बेची जा रही है। यात्री अनजाने में 1 रुपए अतिरिक्त दे रहे हैं, जिसका सीधा फायदा स्टॉल संचालक उठा रहे हैं। रेलवे प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
वर्तमान प्रबंधन पर सवाल, पूर्व मास्टर आ रहे याद
यात्रियों और शहरवासियों में मौजूदा स्टेशन प्रबंधक की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा रोष है। लोगों का मानना है कि वर्तमान अधिकारियों को यहां की अव्यवस्थाओं से कोई सरोकार नहीं है। इस लचर व्यवस्था के बीच, लोग इटारसी के पूर्व स्टेशन मास्टर देवेंद्र सिंह चौहान के कार्यकाल को याद कर रहे हैं, जिनके स्थानांतरण के बाद स्टेशन पर सफाई व्यवस्था और अवैध वेंडिंग पर लगाम लगभग खत्म हो गई है।
इटारसी स्टेशन पर बदहाली
ट्रेनों में वाटरिंग के दौरान पानी प्लेटफॉर्म पर बहता है, जिससे फिसलन का खतरा रहता है। प्लेटफॉर्म पर कचरे का निपटान नियमित नहीं हो रहा है। रेलवे ट्रैक पर मवेशियों का विचरण आम हो गया है। स्टेशन के कायाकल्प का काम मंथर गति से चल रहा है, जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है। ओवरब्रिज पर इंडिकेटर डिस्प्ले भी ठीक से काम नहीं करते हैं।








