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राक्षसों के नाश, साधु संतों की रक्षा के लिए दशरथ ने विश्वामित्र को सौंपे राम लखन

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  • श्रीराम जन्मोत्सव के अंतर्गत श्री राम कथा का तृतीय दिवस

इटारसी। श्री द्वारिकाधीश बड़ा मंदिर (Shri Dwarkadhish Bada Temple) में श्री रामजन्म महोत्सव (Shri Ramjanam Mahotsav) अंतर्गत श्री रामकथा (Shri Ramkatha) में चित्रकूट की पं. नीलम गायत्री (Pt. Neelam Gayatri) ने तृतीय दिवस की रामकथा को विस्तार देते हुए कहा कि राजा दशरथ (King Dashrath) की अयोध्या (Ayodhya) में सभी और सुख चैन था, परंतु जंगलों में निवास करने वाले ऋषि-मुनियों को राक्षस तंग किया करते थे और उनके यज्ञ में विघ्न पैदा करते थे। साध्वी गायत्री ने कहा कि विश्वामित्र मुनि (Vishwamitra Muni,) को जब पता लगा कि तब मुनिबर मन कीन्ह विचारा। प्रभु अवतरेउ हरन महि भारा। पृथ्वी का भार उतारने के लिए प्रभु मनुष्य रूप में अवतार लिया। विश्वामित्र जी अयोध्या पहुंचे और राजा दशरथ से उन्होंने कहा कि असुर समूह सतावन मोहि। में जाचन आयहु नृप तोहि। ऋषि विश्वामित्र ने राजा दशरथ ने कहा कि असुर समूह उनको परेशान करते हैं उन्होंने राजा दशरथ से कहा कि अनुज समेत देहु रघुनाथा। निशिचर बध में होब सनाथा।

अयोध्या पति राजा दशरथ ने पहले तो दोनों पुत्रों को देने से मना किया और विश्वामित्र से हाथ जोड़कर कहा कि इसके बदले कुछ और मांग लें। तब विश्वामित्र ने राजा के कर्तव्यों की याद दिलाई तब राजा दशरथ ने राम लक्ष्मण (Ram Lakshman) को विश्वामित्र को सौंप दिया। साध्वी गायत्री ने विश्वामित्र और राजा दशरथ के प्रसंग को बहुत ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करते हुए कहा कि ऐसा कौन पिता होगा जो अपने कुल में वर्षों पश्चात आई हुई संतानों को युवा अवस्था में राक्षसों के अंत के लिए ऋषि-मुनियों को सौंप देगा, परंतु राजा दशरथ का पुत्र मोह कुछ समय ही रहा और उनको जब वास्तविक ज्ञान हुआ कि राजा का यह कर्तव्य है, प्रजा सुखी रहे, तब उन्होंने राम और लक्ष्मण को विश्वामित्र मुनि को सौंप दिया। राम और लक्ष्मण ने ऋषि विश्वामित्र के साथ जाकर उनके यज्ञ की रक्षा की और ताड़का नामक राक्षसी का वध किया।

प्रवक्ता भूपेंद्र विश्वकर्मा (Spokesperson Bhupendra Vishwakarma) ने बताया कि द्वारिकाधीश बड़ा मंदिर तुलसी चौक में सायंकाल 7 बजे से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने रामकथा का भरपूर आनंद लिया। संचालन अभिषेक तिवारी ने किया। व्यासपीठ पर विराजित ठाकुर जी, रामचरित मानस एवं रामायण की पूजा आयोजन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष विपिन चांडक ने की। साध्वी का स्वागत समिति के अध्यक्ष सतीश अग्रवाल सावरिया, सचिव अशोक शर्मा, कोषाध्यक्ष प्रकाश मिश्रा, सह कोषाध्यक्ष अमित सेठ, एम एल गौर, अर्पण माहेश्वरी, राकेश जाधव, हरप्रीत छाबड़ा, सचिन मालवीय, राहुल चौरे, शैलेंद्र दुबे, विशाल कुशवाह, अवधेश तिवारी, मंदिर समिति के प्रबंधक दिनेश सैनी ने पुष्पहार से स्वागत किया।

Rohit Nage

Rohit Nage has 30 years' experience in the field of journalism. He has vast experience of writing articles, news story, sports news, political news.

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