इटारसी। जैन समाज के पर्यूषण पर्व (paryushan festival) के दौरान श्री तारण समाज संगठन सभा ने कोरोना महामारी की तीसरी लहर की आशंका के चलते एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत दस दिनों में जिन समाज के परिवार से जिस दिन प्रसाद प्रभावना होगी, केवल उनका ही पूरा परिवार मंदिर विधि एवं आरती-भजन में शामिल होगा। दशलक्षण पर्यूषण पर्व पर कोरोना महामारी को देखते हुए ये निर्णय लिये गये है।
संगठन ने यह भी निर्णय लिया है कि प्रसाद प्रभावना वाले परिवार के अलावा समाज के अन्य श्रद्धालु उसके पूर्व में होने वाले प्रवचनों का सुबह-षाम व दर्षन का लाभ उठा सकेंगे। संगठन की ओर से जानकारी दी गई है कि मंदिर परिसर में मास्क-सेनेटाइजर व सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) का पालन सभी के लिए अनिवार्य होगा। वर्तमान मंे विभिन्न घार्मिक आयोजनों में कोरोना नियम मं ढिलाई को देखते हुए व संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए श्री तारण तरण समाज इटारसी ने निर्णय लिया है, जो अन्य शहरों में स्थित समाज के लिए अनुकरणीय होगा। जानकारी में बताया गया है कि पहली लाईन स्थित चैैत्यालय में टीकमगढ़ से आयेे विद्वान शास्त्री श्री आशीष के मंगल प्रवचन 10 सितंबर 21 से प्रातः 9 से 10 बजे तक एवं रात्रि 9 से 9ः45 तक नियमित दस दिवसीय रहेंगे। प्रातः 10 से 12ः30 बजे तक मंदिर विधि एवं आरती-भजन का कार्यक्रम पूर्व निर्धारित प्रसाद प्रभावना वाले परिवारों द्वारा आयोजन सीमित संख्या में रहेगा।