इटारसी। नर्मदा अष्टक महा आरती एवं विशाल भंडारे के साथ संपन्न हुआ श्री नर्मदा पुराण कथा उत्सव। संपूर्ण भारत वर्ष में मां नर्मदा ही ऐसी पावन पुण्य नदी है जिस की परिक्रमा करने से चारों तीर्थ का फल प्राप्त होता है, क्योंकि नर्मदा परिक्रमा से भगवान शिव की परिक्रमा भी हो जाती है।
उक्त विचार आचार्य मधुसूदन शास्त्री (Acharya Madhusudan Shastri) ने संस्कार मंडपम में आयोजित नर्मदा महापुराण कथा महोत्सव के समापन दिवस में व्यक्त किए। श्री नर्मदा पुराण कथा उत्सव के विश्राम दिवस में आचार्य मधुसूदन महाराज ने अनेक ज्ञान पूर्ण प्रसंगों के साथ ही श्री ओमकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (Shri Omkareshwar Jyotirlinga) का विशेष वर्णन करते हुए कहा कि श्री नर्मदा (Narmada) ही एकमात्र ऐसी नदी है जिसकी जलधारा रूपी गोद में स्वयं महादेव ओमकारेश्वर रूप में विराजमान हैं। जीवन में एक बार अवश्य नर्मदा जी की परिक्रमा करना चाहिए इससे हमारे जीवन के सभी पापों का नाश होता है।
आयोजन स्थल पर मधुर भजनों की प्रस्तुतिके साथ मां नर्मदा की महाआरती पांच बड़े महाद्वीपों के साथ ब्राह्मणों ने की गई। नर्मदा अष्टक प्रवचन कर्ता मधुसूदन महाराज ने प्रस्तुत किए। दीनदयाल पटेल (Deendayal Patel), मिश्री लाल पटेल(Mishri Lal Patel), बलराम पटेल(Balram Patel), अनिरुद्ध पटेल (Anirudh Patel) एवं नंदकिशोर(Nandkishore), विनोद(Vinod), प्रमोद (Pramod) एवं गोलू पटेल (Golu Patel) ने मधुसूदन, भागवताचार्य पं. जगदीश पांडे (Jagdish Pandey) एवं अन्य वर्णों को सम्मानित किया। मां नर्मदा की प्रतिमा का निर्माण करने वाले मूर्तिकार कृष्ण कुमार पटेल (Krishna Kumar Patel) को भी सम्मानित किया। संचालक ब्रजकिशोर पटेल (Brajkishore Patel) ने आध्यात्मिक कविता भी सुनाई आभार प्रदर्शन अनिरुद्ध पटेल ने किया।
नर्मदा परिक्रमा से मिलता है चारों तीर्थ का फल


Rohit Nage
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