---Advertisement---

(अपडेट) सेकेंडरी एग्रीकल्चर से ही रूक सकता है किसानों का पलायन : द्रौपदी मुर्मू

By
On:
Follow Us
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सभा काे संबाेधित करते हुए
राज्यपाल  राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु को स्मृति चिन्ह भेंट करते हुए
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु को स्मृति चिन्ह भेंट करते हुए

रांची, 20 सितंबर (हि.स.)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि झारखंड के प्रति मेरा विशेष लगाव है। धरती आबा बिरसा मुंडा की धरती पर आना मेरे लिए तीर्थ यात्रा के समान है। यहां के लोगों से बहुत स्नेह मिला है। राज्यपाल के तौर पर मैंने यहां कई वर्षों तक काम किया है। वे शुक्रवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित शताब्दी समारोह को संबोधित कर रही थीं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने भाषण की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा के जयकारे के साथ किया। उन्होंने कहा कि झारखंड से उनका विशेष लगाव है। 2017 में इस संस्थान के साथ मिलकर कृषि मेले का उद्घाटन किया था। संस्थान ने लाख, रेजिन जैसे कई उत्पादों में विशेष योगदान दिया। लाख के उत्कृष्ट किसानों को सम्मानित करने का मौका मिला। उस समय मुझे बताया गया कि किसान कैसे लाह द्वारा कैसे लाभान्वित होते थे। आज इस संस्थान के शताब्दी वर्ष पूरे होने पर मुझे अत्यंत खुशी हो रही है।

मुर्मू ने कहा कि आज का दौर आधुनिक तकनीक का है। इसका इस्तेमाल करना है मगर इसके दुष्प्रभाव से बचना है। अभी भी अनेक क्षेत्र हैं जहां हम और आगे जा सकते हैं। लाह के उत्पादन, सप्लाई चैन और मार्केटिंग में सुधार किया जाए तो हम लाह की खेती में और आगे बढ़ सकते हैं। गांवों में कृषि आधारित भंडारण नीति बनायी जा रही है। अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी हमारी कृषि एवं उत्पाद कैसे आगे बढ़े, इसके लिए काम करने जरूरत है। मगर आज भी हमारे किसानों गरीबी में जीने को विवश हैं। इस दिशा में काम करने की जरूरत है। सेकेंडरी कृषि इसका विकल्प हो सकता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और वे गांव में नहीं छोड़ेंगे। सेंकेंडरी कृषि उत्पाद हम बेहतर दिशा में बढ़ सकते हैं। वेस्टेज वस्तुओं को हम रीसाइकलिंग करके उपयोगी एवं मूल्यवान वस्तुएं बनाए जा सकते हैं। एक बदाम के छिलके से कैसे वे लाभान्वित हो सकते हैं। यह संस्थान लाह के साथ गम के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस संस्थान का लाभ अन्य संस्थानों को मिलना चाहिए। यह संस्थान प्रशिक्षण के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रहे हैं।

उन्हाेंने कहा कि भारत में लाह का उत्पादन मुख्य रूप से जनजातीय समुदाय के द्वारा किया जाता है। इस संस्थान में लाह के साथ-साथ कई लाह से जुड़े कई उत्पाद किए जा रहे हैं। यह भी गर्व की बात है कि झारखंड में इसका उत्पादन देश में 55 प्रतिशत है। कौशल विकास के लिए भी प्रशिक्षण आयोजन किया जाता है। एसएजी समूह की बहने बहुत मेहनती हैं, जो कृषि के साथ अन्य उत्पाद से जुडे हैं।

राष्ट्रपति नेकहा कि जानकारी मिली कि जो रॉ लाह होता है वह 100-200 में भेजा जाता था लेकिन बाद में जब विदेश भेजा जाता था तो उसकी कीमत 3000-4000 होता था। मैं जब दौरा करती थी राज्य के अलग-अलग जिला में तो मैं पलामू गई थी। पलामू जाने पर मुझे पता चला कि पलामू का नाम पलाश, लाह और महुआ के नाम पर रखा गया है। हमारे देश के कई राज्य में लाह की फार्मिंग की जाती है। भारत के कुल उत्पादन का 55 प्रतिशत से अधिक लाख उत्पादन झारखंड में किया जाता है। भारत में लाह का उत्पादन जनजातियों के द्वारा किया जाता है। अंत में उन्होंने कहा कि मैं सभी किसान भाई बहनों, संस्थान से जुडे़ सभी लोगों, यहां उपस्थित सभी लोगों के स्वर्णिम भविष्य की कामना करती हूं।

कोल्ड स्टेरेज बनाने पर दिया जोर

राष्ट्रपति ने कहा कि जो सब्जी उत्पादन करते हैं लेकिन उसके बाद सब्जी खराब हो जाती है। इस लिए अधिकारियों से निवेदन है कि कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था की जाए। आज का दौर विश्व रुपी का है परंतु दुष्परिणाम से बचना है। अभी भी कई क्षेत्र है, जहां हम आगे जा सकते हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि सप्लाई चेन, बाजार की व्यवस्था करने से किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकता है। कृषि के विकास के लिए कई कार्य किए जा रहे हैं। सहकारिता क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी भंडारण की व्यवस्था की है। पीएम किसान निधि से लाभ दिया जा रहा है।

पशुपालन से होगा छोटे किसानों को लाभ

उन्होंने कहा कि किसान आज भी गरीबी में जी रहे हैं। उन्होंने मधुमक्खी, पशुपालन से विकास, गांवों में छोटे उद्योगों से किसानों को लाभ होगा. कई वेस्ट चीजें फेंक देते हैं जिससे भी हम प्रसंस्करण कर लाभ ले सकते हैं। देश के साथ विदेशों में भी कृषि उत्पादन में पैंठ होनी चाहिए। संस्थान को अन्य संस्थानों से मिलकर काम करना चाहिए।

अपने राज्यपाल के कार्यकाल को किया याद

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने राज्यपाल के दिनों को याद करते हुए बोला कि जब मैं पलामू गई थी तो वहां मुझे बताया गया कि पलाश ,लाख एवं महुवा के नाम पर पलामू का काम रखा गया है। लाख का 55 प्रतिशत उत्पादन होता है जो जनजातीय समुदाय के द्वारा जाता है। लाख आधारित विकास को बढ़ावा दिया जाता है। जीवन यापन को सुधारने में लाभकारी है। किसानों एवं उद्यमियों के समस्या के समाधान के लिए कार्य किया जा रहा है।

धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पावन भूमि झारखंड से प्रस्थान के क्रम में बिरसा मुंडा हवाई अड्डा, रांची में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार तथा मुख्यमंत्री हेमंत साेरेन ने द्रौपदी मुर्मु को स्मृति चिह्न भेंट किया।

For Feedback - info[@]narmadanchal.com
Join Our WhatsApp Channel
error: Content is protected !!
Narmadanchal News
Privacy Overview

This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful.