इटारसी। साल के पहले चंद्र ग्रहण का असर आज धार्मिक और सामाजिक जनजीवन पर साफ देखा जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, ग्रहण का सूतक काल शुरू होते ही शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रमुख मंदिरों के कपाट (पट) श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए हैं।
सूतक काल में वर्जित हुए शुभ कार्य

शास्त्रों के अनुसार, चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पूर्व सूतक काल प्रभावी हो जाता है। इसी परंपरा का पालन करते हुए सुबह से ही मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के बाद पट मंगल कर दिए गए। श्री द्वारिकाधीश मंदिर, श्री बूढ़ी माता मंदिर, श्री हनुमानधाम मंदिर सहित शहर के सभी मंदिरों में पट बंद कर दिये और पर्दे डाल दिए गए हैं। अब ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण और गंगाजल छिड़काव के बाद ही भगवान के दर्शन सुलभ होंगे। धार्मिक मान्यता अनुसार सूतक काल के दौरान भोजन बनाना, खाना और शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है।
ग्रहण समाप्ति के बाद होगा शुद्धिकरण
ज्योतिषियों के अनुसार, ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों की साफ-सफाई की जाएगी। मूर्तियों का अभिषेक कर उन्हें नए वस्त्र धारण कराए जाएंगे, जिसके बाद शाम की आरती के साथ पुन: दर्शन प्रारंभ होंगे। श्रद्धालुओं ने भी ग्रहण के बाद पवित्र नदियों में स्नान और घर के शुद्धिकरण की योजना बनाई है।








